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भविष्य के साथी, उद्धव ठाकरे के बयान से भाजपा और शिवसेना के साथ आने के कयास तेज

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मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से शुक्रवार को एक कार्यक्रम में ‘भविष्य के साथी’ का बयान देने को लेकर कयास तेज हो गए हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कड़वाहट के दौर से गुजर रहे शिवसेना और भाजपा के साथ आने के कयास इस बयान से लग रहे हैं।
शुक्रवार को औरंगाबाद में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘मंच पर बैठे मेरे पूर्व, मौजूदा और यदि हम साथ आते हैं तो भविष्य के सहयोगी’। उद्धव ठाकरे के करीबी और सरकार में मंत्री अनिल परब के खिलाफ हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू की है और छापेमारी भी की थी। इन घटनाओं और उद्धव ठाकरे के बयान को जोड़कर देखते हुए तमाम कयास लगाए जा रहे हैं।

हालांकि शिवसेना के नेताओं ने भाजपा के साथ आने की अफवाहों को खारिज किया है। यही नहीं नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने भी ऐसी अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल शिवसेना और भाजपा के साथ आने की कोई संभावना नहीं है। उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में कहा, ‘मेरे मौजूदा, पूर्व और यदि हम साथ आते हैं तो फिर भविष्य के सहयोगी…’। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, जहां रेल राज्य मंत्री राव साहेब दानवे बैठे हुए थे। इस साल यह दूसरा मौका है, जब भाजपा और शिवसेना के साथ आने के कयास लग रहे हैं।

जून में प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद भी लग रहे थे कयास

इससे पहले जून में पीएम नरेंद्र मोदी से उद्धव ठाकरे की 45 मिनट तक मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। उद्धव की मीटिंग और फिर राउत के बयान के बाद तब भी दोनों दलों के साथ आने को लेकर अटकलें लगाई गई थीं। उद्धव ठाकरे के इस बयान से कयास इसलिए भी तेज हो गए क्योंकि कार्यक्रम के बाद भी मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इसका खंडन नहीं किया। मीडिया के पूछने पर ठाकरे ने कहा कि यह समय बताएगा कि भविष्य के सहयोगी का क्या अर्थ है।

अहंकार से परे रहकर राज्य की भलाई के लिए करना है काम

हालांकि उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘मैं ईमानदारी से सोचता हूं कि राजनीति में बहुत कड़वाहट नहीं होनी चाहिए। फिलहाल राज्य में महाविकास अघाड़ी की सरकार है और भाजपा की केंद्र में सरकार है। पर हम सभी लोगों का ताल्लुक इसी धरती से है। ऐसे में हमें यह सोचना चाहिए कि अहंकार मन में रखे बिना कैसे राज्य की भलाई के लिए हम लोग अपना योगदान दे सकते हैं।’ ठाकरे ने कहा कि मैंने दानवे को मुंबई से नागपुर को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर चर्चा के लिए बुलाया था।

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