Home राजनीती संसद सत्र से पहले राजधानी में बढ़ी रही सियासी सरगरमियां

संसद सत्र से पहले राजधानी में बढ़ी रही सियासी सरगरमियां

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  • पंजाब, कर्नाटक से लेकर महाराष्ट्र तक की हुई राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली, ब्यूरो

संसद सत्र शुरू होने से पहले दिल्ली में सियासी तापमान बढ़ गया है। इस तापमान की राजनीतिक गरमी का असर पंजाब, महाराष्ट्र और कर्नाटक तक में पडऩे वाला है। राजनीतिक सियासत की इस गरमी से तीनों राज्यों में भूचाल की संभावना बन गई है। पंजाब और महाराष्ट्र में कांग्रेस की मुसीबतें कमने का नाम नहीं ले रही है तो कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। हालांकि मुख्यमंत्री येदुरप्पा ने अपने दिल्ली दौरे में इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

राजधानी की सियासी गरमी को सबसे अधिक बढ़ाने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मुलाकात ने किया। दोनों नेताओं के बीच आधे घंटे की मुलाकात हुई। इस मुलाकात के फोटो कुछ राजनीतिक संदेश की ओर इशारा कर रहा है। दोनों नेताओं की चेहरे की मुस्कान यह बताने के लिए काफी है कि राजनीतिक खिचड़ी पक चुकी है। बस अब खाने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि यह राजनीतिक खिचड़ी संसद से लेकर महाराष्ट्र तक के लिए है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मोदी से पवार की मुलाकात के एक दिन पहले ही पीयूष गोयल और एनसीपी प्रमुख की मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात ने ही प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात की नींव रख दी थी।

इन दोनों मुलाकातों के कई राजनीतिक मायने हैं। इसमें पहला संसद का सत्र है तो दूसरा महाराष्ट्र का। संसद के सत्र में विपक्ष की धार को कम करने के लिए विपक्षी एकजुटता को तोडऩे में शरद पवार सबसे बड़ा हथियार हो सकते हैं। सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को महंगाई और कोरोना महामारी को लेकर हमलावर होने की योजना बना रखी है। इन दोनों मुद्दों पर विपक्षी एकजुटता अगर चट्टान की तरह मजबूत रही तो सरकार को अपनी सफाई देने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। विपक्ष के इस आक्रमण कमजोर करने के लिए इनकी एकता में सेंध लगाना सबसे बेहतर नीति साबित होगी।

विपक्ष के नेता ही सरकार के कामों की तारीफ करेंगे तो कांग्रेस की बातों पर लोगों का भरोसा नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात को इसी क्रम का हिस्सा माना जा सकता है। वहीं इस मुलाकात से महाराष्ट्र की सियासत को भी जोड़ कर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में कलह की बातें सामने आती रहती है। शिवसेना के साथ न तो कांग्रेस ढंग से घुल पा रही है और न एनसीपी। ऐसे में भाजपा को दोबारा से सत्ता में आने का मौका मिल सकता है। भाजपा और एनसीपी मिलकर सत्ता हासिल कर सकती है। भाजपा सत्ता के लिए शिवसेना को भी साथ लाना चाहती है।

विगत कुछ दिनों से शिवसेना नेताओं के बयान इसकी ओर इशारा भी कर रहे है। पर भाजपा की मुश्किल यह है कि शिवसेना मुख्यमंत्री पद पर अड़ी हुई है। जबकि भाजपा मुख्यमंत्री पद अपने पास रखना चाहती है। मुख्यमंत्री पद के लिए ही केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस को जगह नहीं दी गई। उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति के लिए छोड़ा गया। एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने पर भाजपा को मुख्यमंत्री पद हासिल करने में दिक्कत नहीं होगी। यही वजह है कि आज की मुलाकात के कई मायने स्पष्ट नजर आ रहे हैं।

पंजाब और कर्नाटक में भी मची हुई उथलपुथल

पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धु के बीच छिड़ी जंग अब आर—पार की स्थिति में आ पहुंची है। दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में पंजाब कांग्रेस टूट की ओर बढ़ सकती है। समझौता न हो पाने की स्थिति में पार्टी का कोई एक धरा बाय—बाय करने की स्थिति में आ जाएगा।

वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा भी आज दिल्ली में मौजूद है। उन्होंने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान येदुरप्पा के इस्तीफे की अफवाह ने तेजी पकड़ी। पर येदुरप्पा ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ राज्य के विकास से जुड़ी बातें हुई।

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