किसान नेताओं ने तोड़ा वादा, वापसी न करने वालों पर अब हो ऐक्शन : अठावले

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नई दिल्ली। ‘अगर किसान घर वापस नहीं जा रहे हैं तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।’ यह मांग की है केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने। भले ही केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया हो लेकिन किसान MSP पर नया कानून बनाने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं और उनका आंदोलन अभी भी जा रही है। लेकिन लगता है केंद्रीय मंत्री को किसानों का यह आंदोलन रास नहीं आया है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री ने आंदोलन नहीं खत्म कर रहे किसानों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर दी।

किसानों पर कड़ी कार्रवाई करें

रामदास अठावले ने कहा, ‘किसान नेता कह रहे थे कि जब तक कानून वापस नहीं लिये जाते वो घर वापस नहीं जाएग। जब केंद्रीय कैबिनेट ने कानूनों को रद्द करने का फैसला कर लिया है तब राकेश टिकैत और अन्य दूसरे किसानों को आंदोलन खत्म कर घर चले जाना चाहिए। अगर वो घर वापस नहीं जाते हैं तब उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।’

प्रधानमंत्री ने कृषि कानून वापस लेने का किया था ऐलान

पिछले साल 26 नवंबर से किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सामने आकर इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में जरुरी बिल लाएगी ताकि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी ऐलान किया था कि सरकार एक कमेटी बनाएगी तो न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर नये सिरे से काम करेगी।

राकेश टिकैत ने किया है यह ऐलान

हालांकि, प्रदर्शन कर रहे किसान सिर्फ तीन कृषि कानूनों को वापस लिये जाने से खुश नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा था कि एमएसपी समेत अन्य मांगों को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा। राकेश टिकैत ने बताया था कि 29 दिसंबर को शीतकालीन सत्र के दौरान 60 ट्रैक्टर संसद पहुंचेंगे।

प्रदर्शन के एक साल

इधर केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के प्रदर्शन के एक साल पूरा होने के मौके पर शुक्रवार को दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित गाजीपुर में ट्रैक्टरों के साथ बड़ी संख्या में किसान पहुंचने लगे हैं। इनमें से कई लोग अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सब्जियां, आटे और दाल के बोरे, मसाले और खाना पकाने का तेल साथ लाए हैं। उन्होंने कहा कि वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रभावशाली किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) पिछले साल नवंबर से गाजीपुर सीमा पर मोर्चा संभाल रहा है।

भाकियू, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का हिस्सा है। किसानों का यह समूह तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी के लिए प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ट्वीट किया, ”एक साल का लम्बा संघर्ष बेमिसाल, थोड़ी खुशी थोड़ा गम, लड़ रहे हैं जीत रहे हैं, लड़ेंगे जीतेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून किसानों का अधिकार।”

किसान मना रहे जश्न

सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का एक साल पूरा होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को यहां सिंघू बॉर्डर पर उत्सव जैसा माहौल नजर आया। प्रदर्शन स्थल पर ट्रैक्टरों, पंजाबी और हरियाणवी गीत-संगीत के साथ प्रदर्शनकारी किसान बेहद खुश नजर आ रहे थे। रंग-बिरंगी पगड़ी पहने किसान लंबी दाढ़ी को संवारते और मुड़ी हुई मूंछों पर ताव लगाते नजर आए तथा ट्रैक्टरों पर नृत्य किया। उन्होंने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को गले लगाया। यह अवसर किसी बड़े त्योहार की तरह लग रहा था।

इनमें से हजारों किसान पिछले कुछ दिनों में पहुंचे हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा किए जाने के बाद गजब का उत्साह है। पिछले एक साल में प्रदर्शन स्थल एक अस्थायी नगर बन गया है, जहां सभी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच अपने-अपने किसान संगठनों के झंडे लिए बच्चे और बुजुर्ग, स्त्री और पुरुष इंकलाब जिंदाबाद तथा मजदूर किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाते नजर आए।

प्रियंका गांधी का भाजपा पर निशाना

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने किसानों के आंदोलन का एक साल पूरा होने के मौके पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि इस सत्याग्रह को भाजपा सरकार के ‘अहंकार एवं अत्याचार’ के लिए जाना जाएगा। उन्होंने ट्वीट किया, ”किसान आंदोलन का एक साल। किसानों के अडिग सत्याग्रह, 700 किसानों की शहादत और निर्मम भाजपा सरकार के अहंकार व अन्नदाताओं पर अत्याचार के लिए जाना जाएगा, लेकिन भारत में किसान की जय-जयकार हमेशा थी, है और रहेगी। किसानों के संघर्ष की जीत इसका प्रमाण है। जय किसान।”

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