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कांग्रेस के पेगासस मामले को भाजपा नहीं देगी तवज्जो

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  • आम लोगों से इसका नहीं है कोई सरोकार

नई दिल्ली, ब्यूरो

मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस पेगासस मामले को जोड़ शोर से उठा रही है। इस पर चर्चा कराने की मांग के नाम पर हंगामा कर सदन को बाधित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। कांग्रेस के हंगामें की वजह से संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार नौवें दिन भी बाधित रही। दूसरी ओर मोदी सरकार सत्र चलाने के लिए सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार होने की बात भी कर रही है। पर चर्चा नहीं हो पा रही है। दरअसल भाजपा पेगासस मामले को तूल देने के मूड में नहीं है।

भाजपा यह मानती है कि पेगासस विवाद केवल हाई प्रोफाइल लोगों के चोचले हैं। आम जनता का इससे कोई सरोकार नहीं है। भाजपा यह भी मानती है कि मानसून सत्र समाप्त होने के बाद पेगासस मामला काल की गर्त में स्वयंमेव समा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पेगासस को लेकर कुछ बड़े अधिकारी और कुछ बड़े नेता ही सशंकित है। आम जनता में इसकी कोई चर्चा तक नहीं होती है। भाजपा यह भी मानती है कि आने वाले किसी भी चुनाव में इस मुद्दे पर न तो कोई वोट मांगेगा और न ही जनता इस मुद्दे को आधार बनाकर वोट देगी।

यह केवल हाईप्रोफाइल मामला है। जो संसद सत्र होने की वजह से सुर्खियां बटोर रहा है। कांग्रेस इसलिए परेशान है कि उनके नेता का नाम सामने आ गया है। राहुल गांधी की जगह किसी अन्य नेता का नाम होता तो कांग्रेस भी इतना शोरगुल न मचाती। आम जनता पर पेगासस के प्रभाव को देखते हुए ही भाजपा सत्र के दौरान विपक्ष के दबाव में नहीं आ रही है। संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने आज लोकसभा में इस बात पर मुहर भी लगा दी। उन्होंने कहा कि पेगासस मामला ने तो मुद्दा है और न गंभीर बात। सरकार पेगासस को लेकर अपनी बातें पहले ही कह चुकी है। सरकार कह चुकी है कि यह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। देश में और भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिस पर चर्चा होनी चाहिए।

पंचायत चुनाव परिणाम ने किसान आंदोलन पर न झुकने का बना दिया हौसला

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष पेगासस के अलावा किसान आंदोलन पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा करना चाहता है। पर सरकार की कान पर जूं नहीं रेंग रही है। दरअसल किसान आंदोलन का प्रभाव सरकार देख चुकी है। हाल ही उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनावों ने भाजपा का हौसला बुलंद कर दिया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में भी भाजपा ने पंचायत चुनाव में अपना परचम लहराया। जबकि पश्चिम उत्तर प्रदेश किसान आंदोलन करने वाले नेताओं का गढ़ है।

इन नेताओं के क्षेत्र में भी भाजपा ने जीत दर्ज की है। इसी जीत से उत्साहित होकर भाजपा अब किसान आंदोलनकारियों को ज्यादा तवज्जों देने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि सत्र के दौरान भी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर यही कह रहे हैं कि कृषि कानून को रद्द करने को छोड़ उसके किसी प्रावधानों पर दिक्कत हो तो उस पर सरकार बातचीत के लिए तैयार है। मतलब साफ है सरकार आंदोलनकारी किसानों के आगे झुकने वाली नहीं है।

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