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जी-20 में रखी जाएगी ऋग्वेद की सबसे प्राचीन कॉपी, भारत मंडपम में दिखेगी धार्मिक झलक

नई दिल्ली। भारत में 8 से 10 सितम्बर के बीच जी-20 सम्मलेन का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर राजधानी में जोरदार तैयारियां चल रही है। इसका सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में किया जा रहा है। जिसमें विदेशी मेहमानों के लिए विशेष तौर पर ऋग्वेद की सबसे पुरमी कॉपी, मैग्ना कार्टा की एक प्रति, यूनाइटेड किंगडम के 12वीं शताब्दी के शाही अधिकारों का चार्टर, इटली कलाकार लियोनार्डो दा विंची की मोना लिसा का डिजिटल संस्करण और दक्षिण अफ्रीका की श्रीमती प्लेस की 2.5 मिलियन वर्ष पुरानी खोपड़ी को दर्शाया जाएगा।

सांस्कृतिक गलियारे के कई डिजिटल और भौतिक प्रदर्शन जिन्हें भारत G20 शिखर सम्मेलन के लिए तैयार कर रहा है। संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत योग, वैदिक मंत्रों आदि के साथ-साथ दार्शनिक पाणिनि के प्राचीन पाठ अष्टाध्यायी की एक प्रति को भौतिक प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाएगा। सम्मलेन के कल्चर कॉरिडोर में रखने के लिए ऋग्वेद की सबसे पुरानी पांडुलिपि भी मंगवाई गई है। ऋग्वेद की यह सबसे पुरानी पांडुलिपि पुणे के एक संग्रहालय में रखी हुई है।

आपको बता दें, ऋग्वेद दुनिया का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। कहा जाता है कि ये खुद ईश्वर की वाणी है, जिसे ऋषि-मुनियों को सुनाया गया। कुल 4 वेद हैं, जिनमें ऋग्वेद सबसे पुराना है। ऋग्वेद में पुरातन ज्ञान-विज्ञान का भंडार है, जिसमें मानव कल्याण के बारे में बताया गया है। वेद इसलिए भी सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये मानव द्वारा लिखित नहीं, ईश्वर द्वारा ऋषियों को सुने ज्ञान के आधार पर लिखे गए हैं। यही वजह है कि वेदों को ‘श्रुति’ कहा जाता है। ऋग्वेद के 10 अध्याय में 1028 सूक्त में 11 हजार मंत्र है।

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