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भारत में महिला शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ी, जापान-मिस्र को पीछे छोड़ दुनिया में तीसरे नंबर पर आया देश

  • भारत में पिछले 10 वर्षों में सक्रिय महिला शोधकर्ताओं की संख्या प्रति वर्ष 2 फीसदी की दर से बढ़ रही है।
  • केवल मिस्र और नीदरलैंड्स में महिला शोधकर्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है।

नई दिल्ली । भारत में महिला शोधकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इस वृद्धि में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। बावजूद, शोध क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर लैंगिक असमानता के चलते पुरुषों के मुकाबले अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वैज्ञानिक सूचना प्रसारक एल्सेवियर ने ‘शोध और नवाचार में लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति – 2024 की समीक्षा’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।

एल्सेवियर इंडिया में अनुसंधान एवं शैक्षणिक मामलों के उपाध्यक्ष प्रोफेसर संदीप संचेती के मुताबिक, भारत में महिला शोधकर्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि लैंगिक समानता के लिए चल रहे प्रयासों को उजागर करती है और यह वास्तव में उत्साहजनक है। उनका कहना है कि हालांकि, हमने अधिक समावेशी शैक्षणिक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

भारत में 10 वर्षों में 2 फीसदी वार्षिक दर से बढ़ी संख्या

भारत में पिछले 10 वर्षों में सक्रिय महिला शोधकर्ताओं की संख्या प्रति वर्ष 2 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इस अवधि के दौरान केवल मिस्र और नीदरलैंड्स में महिला शोधकर्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में 20 वर्षों में कई विषयों और भौगोलिक क्षेत्रों में समावेश और विविधता का विश्लेषण करते हुए पाया गया कि भारत में अब महिलाएं सक्रिय शोधकर्ताओं का 33 प्रतिशत हिस्सा हैं। वहीं, जापान में यह 22 प्रतिशत और मिस्र में 30 प्रतिशत है। इसमें कहा गया है कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा शोध उत्पादक देश है।

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