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RSS को तमिलनाडु में मार्च निकालने की अनुमति मिली, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका को किया खारिज

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मार्च के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। आपको बता दें कि इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने संघ को तय मार्गों से मार्च निकालने की इजाजत दे दी थी। अब देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस याचिका खारिज कर दी है।
मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला बरकरार

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं। एससी ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर 27 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें आज फैसला सुनाते हुए इसे खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने दो अक्तूबर 2022 को तमिलनाडु के 51 जगहों पर रूट मार्च रैली निकालने का एलान किया था। जिस पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी थी। राज्य की डीएमके सरकार ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने का हवाला देकर आरएसएस की रैली को मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
आरएसएस ने हाईकोर्ट का रुख किया

आरएसएस ने राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने कुछ सर्तों के साथ छह जगहों को छोड़कर बाकी जगहों पर आरएसएस को मार्च रैली करने की इजाजत दे दी।  इन शर्तों में आरएसएस कार्यकर्ताओं को बिना लाठी डंडे या हथियारों के मार्च निकालने इजाजत दी गई थी । इसके अलावा किसी भी ऐसे मुद्दे पर बोलने में भी मानाही लगाई थी, जिससे देश की अखंडता पर असर पड़े।