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रेल हादसा: मंत्री पर बढ़ने लगा इस्तीफे का दबाव, सिग्नलिंग प्रणाली में खामी की बात आई

ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे में मौत का आंकड़ा 300 के करीब पहुंचने लगा है। घायलों की तादाद भी 1000 के करीब पहुंच चुकी है। दुर्घटना स्थल की भयावता का अंदाजा तस्वीरों से लगाया जा सकता है। इस दुर्घटना के वजह की जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों पर गाज गिरनी तय है। इस गाज से पहले ही रेल मंत्री अश्विनी कुमार पर भी इस्तीफे देने का दबाव बढ़ गया है। दुर्घटना के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेने का दबाव देकर विपक्ष रेल मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दुर्घटना की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने उच्च स्तरीय बैठक कर घटना की सिलसिलेवार जानकारी ली। उन्होंने घायल लोगों के इलाज के लिए सभी संभव कदम उठाने का निर्देश दिया है। साथ ही ट्रैक को पुनः: चालू करने के लिए युद्धस्तर पर काम करने का भी निर्देश दिया है। वहीं प्राथमिक जांच में यह बात सामने आयी कि इस भीषण घटना के पीछे सिग्नल से संबंधित गलतियां हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि एक मालगाड़ी बहानगा बाजार स्टेशन पर लूप लाइन में खड़ी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि पहले अप मेन लाइन के लिए कोरोमंडल एक्सप्रेस को सिग्नल भेजा गया था। लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया। तब तक कोरोमंडल एक्सप्रेस लूप लाइन पर चली गई और वहां खड़ी मालगाड़ी से उसकी भिड़ंत हो गई। मालगाड़ी से टक्कर के बाद उसके डिब्बे पटरी से उतर गए। दूसरी ओर भारतीय रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा कि बचाव अभियान पूरा हो गया है। हम अब बहाली प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इस मार्ग पर कवच सिस्टम उपलब्ध नहीं था।
क्या कवच रोक पाता यह हादसा
इस हादसे के बाद ‘कवच’ को लेकर सरकार से सवाल पूछे जाने लगे हैं। सरकार कवच को लेकर काफी प्रचार कर चुकी है। कवच का इस्तेमाल अब तक क्यों नहीं हो रहा है। ऐसे तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन इन सवालों से इतर एक महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या कवच इस हादसे को रोक पाने में सफल हो सकता था। प्राथमिक दृष्टि में ऐसा होता संभव नहीं दिख रहा है। क्योंकि ‘कवच’ की तकनीकि प्रणाली यह बताती है कि यह प्रौद्योगिकी माइक्रो प्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और रेडियो संचार के माध्यमों से जुड़ा रहती हैं। यह तकनीक एक निश्चित दूरी के भीतर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता लगाती है, तो ट्रेन के इंजन में लगे उपकरण के माध्यम से निरंतर सचेत करते हुए स्वचालित ब्रेक लगाने में सक्षम है। पर सवाल यह उठता है कि सिग्नल मिलने की वजह से गाड़ी जिस रफ्तार में थी, उस रफ्तार के दौरान सिग्नल बदलने से हुए परिवर्तन के दौरान ब्रेक लगने से गाड़ी को पटरी से उतरने से बचाया जा सकता है?
चिंतन शिविर में रेलवे को बेहतर बनाने की हुई थी चिंता
दिल्ली में रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी दो दिवसीय चिंतन शिविर में भाग ले रहे हैं। इसमें बताया गया कि 26 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएं तो रेलवे एक्सीडेंट फ्री हो जाएगा। इस प्रेजेंटेशन के कुछ घंटों बाद ही ओडिशा से भयंकर रेल दुर्घटना की खबर आ गई। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि इन दिनों अधिकारियों का ध्यान स्टेशन की बिल्डिंग चमकाने पर ज्यादा है। रेलवे का सिस्टम दुरूस्त करने पर कम। वह कहते हैं कि रेलवे की हालत एक कहावत जैसी हो गई है, “ऊपर से फिट-फाट, अंदर से मोकामा घाट”।
सोनिया और खड़गे ने जताया शोक
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रेल हादसे पर दुख जताया। उन्होंने एक शोक संदेश में कहा कि ओडिशा में हुई भयानक ट्रेन दुर्घटना से वह काफी दुखी और व्यथित हैं। उन्होंने दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस बड़े रेल हादसे पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस भयानक घटना में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। ये देखकर मुझे गहरा दुख हुआ है। इस हादसे में जो लोग घायल हुए हैं, उनकी कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता मदद कर रहे हैं। इस घड़ी में हम सभी को एक होकर लोगों की मदद करनी चाहिए। कर्नाटक सरकार भी इसमें लोगों की मदद कर रही हैं।
भाजपा ने अपने कार्यक्रम किए स्थगित
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बालासोर में हुई दुर्घटना पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि भयावह रेल हादसा अत्यंत ही दुखद और मन को शोकाकुल कर देने वाला है। इस भीषण रेल दुर्घटना को देखते हुए भाजपा ने केंद्र सरकार के 9 वर्ष पूरे होने के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों के साथ–साथ देश भर में होने वाले अपने सारे कार्यक्रमों को आज के लिए स्थगित कर दिया है।

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