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भारत- पाक के रिश्तों को सुधारने की हो रही है पहल, व्यापारिक संबंध बेहतर बनाने के लिए उठेंगे कई कदम

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नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार की जो कोशिश फरवरी, 2021 में सीज फायर से शुरू की गई थी वह धीरे धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है। बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला करते हुए भारत से चीनी और कपास आयात करने का फैसला किया है। अगस्त, 2019 में भारत ने जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने का फैसला किया था, तब इमरान सरकार ने भारत से कूटनीतिक व कारोबारी रिश्तों को समाप्त करने का फैसला किया था। संकेत है कि भारत की तरफ से भी जल्द ही द्विपक्षीय कारोबारी रिश्तों को सुधारने को लेकर कुछ एलान किया जाएगा। पाकिस्तान सरकार की इकोनॉमिक कोआर्डिनेशन कमेटी के इस फैसले के बारे में नवनियुक्त वित्त मंत्री हम्माद अजहर ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि गहन विचार विमर्श के बाद भारत से पांच लाख टन चीनी आयात करने का फैसला किया गया है। यह आयात निजी सेक्टर की कंपनियां करेंगी। फैसले के पीछे मुख्य वजह यह बताई गई कि भारत से चीनी आयात करने में दूसरे देशों के मुकाबले लागत कम आएगी। जबकि जून, 2021 से भारत से कपास का आयात करने की इजाजत दी गई है। यह फैसला भी लागत को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पाकिस्तान अभी मिस्त्र समेत दूसरे देशों से कपास का आयात कर रहा है जो काफी महंगा पड़ रहा है। इससे कपड़े की बड़ी मिलें तो चल रही हैं लेकिन छोटी व मझोले आकार की कपड़ा मिलें बंद हो रही हैं। पाकिस्तान जिन देशों में कपड़ा निर्यात कर रहा था वहां बांग्लादेश व श्रीलंका कब्जा कर चुके हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि उनका वाणिज्य मंत्रालय पहले ही इस फैसले की सिफारिश कर चुका है। पाकिस्तान के इस फैसले पर भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन जानकारों के अनुसार यह स्वागतयोग्य कदम है। भारत के पास अभी कपास और चीनी दोनों का अतिरिक्त स्टाक है। मोटे तौर पर देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त चीनी है जिसके लिए विदेशी बाजार खोजे जा रहे हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2021-22 में चीनी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 5300 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने की भी घोषणा की है। दूसरी तरफ देश में 60 लाख गांठ कपास का भी स्टाक है, जिसका निर्यात किया जा सकता है। इन दोनों फैसलों को अमली जामा पहनाने से द्विपक्षीय कारोबार में इस वर्ष अच्छी खासी वृद्धि हो सकती है। वर्ष 2018-19 में इन दोनों देशों के बीच तकरीबन 2.5 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ था। पाकिस्तान ने दो अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद व सेवाओं की भारत से खरीद की थी। इसके पहले के वर्ष में 2.4 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था। लेकिन वर्ष 2019-20 में द्विपक्षीय कारोबार घट कर महज 83 करोड़ डॉलर का रह गया। वर्ष 2020 में पाकिस्तान ने भारत से कोरोना महामारी के मद्देनजर कुछ दवाओं वगैरह का ही आयात किया। उद्योग चैंबरों की पुरानी रिपोर्ट बताती है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार का वास्तविक आंकड़ा तकरीबन 10 अरब डॉलर का है। पाकिस्तानी उद्योगपति बहुत सारा भारतीय उत्पाद व कच्चा माल दूसरे देशों के माध्यम (ज्यादातर दुबई के जरिए) से खरीदते हैं। सूत्रों का कहना है कि द्विपक्षीय कारोबार को लेकर भारत के भीतर भी कुछ मंथन चल रहा है। भारत पहले भी पाक के साथ सामान्य कारोबारी रिश्तों की बात करता रहा है। इमरान सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही उसकी तरफ से नई दिल्ली में नए उच्चायुक्त की नियुक्ति भी की जाएगी। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के फैसले के बाद पाक सरकार ने भारत का कूटनीतिक दर्जा समाप्त किया हुआ है। इसके अलावा ट्रेन व बस सेवाएं बहाल होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

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