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ISRO का ‘फ्री स्पेस क्वांटम कम्युनिकेशन’ परीक्षण सफल हुआ, अब भेजे गए संदेश को नही किया जा सकेगा हैक

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने पहली बार एक ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया है जिससे भेजा गया संदेश किसी भी कीमत पर चोरी नहीं किया जा सकेगा। इस प्रमुख परीक्षण को पूरा करने के लिए कई प्रमुख तकनीकों को स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है, जिसमें ट्रांसमीटर और रिसीवर मॉड्यूल के बीच समय को नोट करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित नाविक रिसीवर का उपयोग शामिल है। इसरो के मुताबिक इस प्रदर्शन में क्वांटम-की-एन्क्रिप्टेड सिग्नल का इस्तेमाल करके लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जा सकती है। वहीं इसरो की ये तकनीक अगर ताकतवर स्तर पर विकसित हो जाती है तो अंतरिक्ष से भेजे गए संदेशों और अपने सैटेलाइट के संदेशों को बेहद कम समय में अत्यधिक सुरक्षित तरीके से हासिल किया जा सकेगा।
क्वांटम कुंजी वितरण क्या है?
क्वांटम कुंजी वितरण प्रौद्योगिकी क्वांटम संचार प्रौद्योगिकी को कम करती है जो क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों के आधार पर बिना शर्त डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जो पारंपरिक एन्क्रिप्शन सिस्टम के साथ संभव नहीं है। वहीं इसरो ने बताया कि क्वांटम क्रिप्टोग्राफी को भविष्य प्रूफ माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कम्प्यूटेशनल पावर में भविष्य की कोई भी प्रगति क्वांटम क्रिप्टोसिस्टम को नहीं तोड़ सकती है।
रात में किया गया परीक्षण
अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर में द लाइन ऑफ़ विजऩ इमारतों के बीच खाली जगह द क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन पाया गया। इस प्रयोग को रात में किया गया था, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि इस पर सूरज की किरणों का कोई असर को नहीं पड़ रहा है।

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