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बिजली कंपनियों की लापरवाही के कारण देश में बढ़ा प्रदूषण, राख के प्रबंधन की बजाय जहां-तहां फेंक दिया

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नई दिल्ली, कोरोना काल में बिजली कंपनियों ने कोयले से उत्पन्न हुई राख के प्रबंधन में चूक की जिससे प्रदूषण में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। एक ताजा अध्ययन में यह दावा किया गया है। दरअसल, कोयला कंपनियों ने कोराना काल में लगे लाकडाउन के मौका का फायदा उठाकर इस राख का उचित प्रबंधन नहीं किया तथा उसे जहां-तहां फेंक दिया। सात राज्यों में ऐसे 17 मामले दर्ज किए गए हैं। कोल ऐश इन इंडिया- वॉल्यूम 2: ऐन एनवायरमेंटल सोशल एंड लीगल कम्पेंडियम ऑफ़ कोल ऐश मिस मैनेजमेंट इन इंडिया 2020-21 शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के अनुसार बिजली कंपनियों ने कोविड-19 के कारण लागू हुए लॉकडाउन को अपने पावर प्लांट में जमा हुई कोल फ्लाई ऐश को जहां-तहां फेंकने के मौके के तौर पर इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक के आंकड़ों को शामिल किया गया है। हेल्दी एनर्जी इनीशिएटिव इंडिया और लीगल इनीशिएटिव फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट लाइफ द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार ये मामले 7 राज्यों मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के हैं। इनमें ऐश पोंड के विखंडन के कारण होने वाले वायु प्रदूषण, कोल फ्लाई ऐश को नदियों, अन्य जल धाराओं तथा तालाबों एवं पोखरों में फेंके जाने की घटनाएं सबसे प्रमुख हैं, जिससे इशारा मिलता है कि भारत में कुल फ्लाई ऐश के प्रबंधन की स्थिति किस कदर खराब है। इनमें से ज्यादातर स्थान ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहां कोल फ्लाई ऐश का निस्तारण एक हर समय बनी रहने वाली समस्या है और लीकेज तथा दुर्घटनाएं होना तो आम बात है। हेल्दी एनर्जी इनीशिएटिव इंडिया की पूजा कुमार के अनुसार दिल्ली जैसे बड़े शहर में, जहां कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान लोग साफ हवा और नीले आसमान का लुत्फ ले रहे हैं, वहीं हमने छत्तीसगढ़ के कोरबा और उत्तरी चेन्नई के एन्नोर और सेप्पक्कम जैसे क्षेत्रों को भी देखा जा सकता है जहां फ्लाई ऐश के खराब प्रबंधन से संबंधित अनेक दुर्घटनाएं सामने आई हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा के सामाजिक कार्यकर्ता श्री लक्ष्मी चौहान कहती हैं कि पिछले एक साल के दौरान कोरबा में कोल फ्लाईऐश प्रदूषण का अभूतपूर्व स्तर देखा गया है। हम यहां पिछले कई दशकों से रह रहे हैं लेकिन ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा गया। पूरे हाईवे और रिंग रोड के किनारे और गांव में हर तरफ फ्लाई ऐश के ढेर देखे जा सकते हैं। सर्दियों के खत्म होने के बाद हम देख रहे हैं कि पूरा का पूरा शहर फ्लाई ऐश से ढक गया है और हम सांस के साथ यह राख भी अपने शरीर में ले रहे हैं। तमाम शिकायतों के बावजूद इन दोषी कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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