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रनवे बनने से भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान को युद्ध के समय मुंहतोड़ जवाब देने में होगी सक्षम

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राजस्थान के बाड़मेर में राष्ट्रीय राजमार्ग 925ए पर हाल ही में एक हवाई पट्टी का उद्घाटन किया गया है। देश की सामरिक आवश्यकताओं के हिसाब से यह नया प्रयोग रणनीतिक क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि देशभर में ऐसी लगभग 20 हवाई पट्टियां और बनाई जाएंगी। राष्ट्रीय राजमार्ग 925ए पर भारतीय वायु सेना के विमानों के लिए बनाया गया यह पहला इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यहां पर कई विमानों के संचालन को देखा। उनके सामने सुखोई-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान, सैन्य परिवहन विमान एएन-32 और एमआइ-17वी हेलीकाप्टर ने इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड पर आपातकालीन लैंडिंग की। यह ईएलएफ करीब तीन किमी लंबी है। आपात स्थिति में इसका उपयोग भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों को उतारने और टेक आफ करने के लिए किया जाएगा। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के समानांतर ही तीन किमी लंबी एयरस्टिप तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य यह है कि यदि युद्ध के समय शत्रु हमारे एयरबेस पर हमला करता है अथवा आक्रमण करके उसे नष्ट कर देता है तो उस दौरान इस इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का प्रयोग किया जा सकता है। विदित हो कि यहां से पाकिस्तान की सीमा मात्र 40 किमी दूर है। ऐसे में किसी युद्ध के समय यहां से बड़े-बड़े अभियान संचालित किए जा सकेंगे। अभी तक हमारे पास पाक सीमा के नजदीक ऐसी कोई एयरस्टिप नहीं थी। अब इसके हो जाने से हमारी आक्रामक क्षमता बढ़ गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने भारतीय वायु सेना के लिए किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में विमानों को उतारने के लिए इस इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण किया है। दरअसल बाड़मेर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के समानांतर जिस एयरस्टिप का निर्माण किया गया है उसे एक छोटा सा एयरफोर्स स्टेशन भी समझा जा सकता है। इस एयरस्टिप की खास बात यह है कि इसके दोनों तरफ पार्किंग स्थल भी तैयार किए गए हैं ताकि लैंडिंग के बाद लड़ाकू विमानों को पार्क किया जा सके। यहां पर एक एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर का निर्माण भी किया गया है। इस एयरस्टिप के दोनों छोर पर आपात स्थिति में प्रयोग के लिए गेट की भी व्यवस्था की गई है। एयरस्टिप के बगल में साढ़े तीन किमी लंबी और सात मीटर चौड़ी सर्विस लेन भी बनाई गई है जो आपात स्थिति में विषेश भूमिका अदा करेगी। इस परियोजना में आपातकालीन लैंडिंग पट्टी के अलावा आसपास के गांवों में सेना की जरूरतों के हिसाब से तीन हेलीपैड का निर्माण भी किया गया है। यह कार्य देश की पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना और सुरक्षा नेटवर्क के लिए मजबूती का आधार होगा। दूसरी ओर कश्मीर दशकों से बेहद संवेदनशील रहा है। भौगोलिक रूप से भी इसके एक ओर पाकिस्तान तो दूसरी ओर चीन है। ऐसे में इसकी सामरिक महत्ता भी अत्यधिक है। लिहाजा दक्षिण कश्मीर के श्रीनगर-जम्मू हाईवे-44 पर भी आपातकालीन परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों के उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए 3500 मीटर लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया जा रहा है। यह हवाई पट्टी बिजबिहाड़ा में बन रही है।

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