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नौसेना को जल्द मिलेंगे प्रिडेटर ड्रोन, भारत और अमेरिका के बीच डील पर दिसंबर में लग सकती है मुहर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने अमेरिकी समकक्ष विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन से मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात वॉशिंगटन में होगी, जिसकी तारीख जल्द ही तय हो जाएंगी.
नई दिल्ली.
भारत और अमेरिका के बीच दिसंबर में 2+2 वार्ता होनी है. ऐसे में सभी की निगाहें बैठक के दौरान 300 करोड़ रुपये की डील की संभावित घोषणा पर टिकी हुई हैं. कहा जा रहा है कि भारतीय नौसेना हथियारों से लैस प्रिडेटर ड्रोन्स की खरीदी के लिए डिफेंस एक्विसिशन काउंसिल का रुख करेगी. बैठक के दौरान अफगानिस्तान में सूखे की समस्य़ा और हिंद-प्रशांत सागर में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार पर चर्चा प्रमुख रूप से होगी. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में नई दिल्ली और वॉशिंगटन के अधिकारियों के हवाले से लिखा गया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने अमेरिकी समकक्ष विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन से मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात वॉशिंगटन में होगी, जिसकी तारीख जल्द ही तय हो जाएंगी. चीन और अफगानिस्तान पर चर्चा के अलावा दोनों पक्ष ड्रोन डील की भी घोषणा कर सकते हैं. हालांकि, यह सरकारी प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर है. रिपोर्ट के अनुसार, यह समझा जाता है कि भारतीय नौसेना 30 MQ 9A प्रिडेटर ड्रोन के अधिग्रहण के लिए एक्सेप्टेंस ऑफ नैसेसिटी (AON) के लिए DAC का रुख करेंगे. नौसेना ही इस पूरी प्रक्रिया को संभाल रही है. इस डील के बाद सेना की तीनों सेवाओं को 10-10 ड्रोन्स मिलेंगे. एक अधिकारी ने कहा, ‘प्रक्रिया जारी है. इसमें DAC की मंजूरी के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की सहमति भी शामिल है.’ उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने की स्थिति में घोषणा की जा सकती है, नहीं तो इसका ऐलान बाद में किया जाएगा. अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी पक्ष पूरे प्रोजेक्ट को लेकर संतुष्टि जाहिर कर चुका है. हाल ही में अमेरिका दौरा कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनरल एटॉमिक्स के सीईओ से मुलाकात की थी. अफगानिस्तान में आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए क्षमता बनाए रखने के लिए अमेरिका, पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति हासिल कर रहा है. इस संदर्भ में भारत को भी ड्रोन क्षमताओं में इजाफा करना होगा, क्योंकि हथियारों से लैस ड्रोन्स के भारत में तैयार होने में बहुत वक्त बाकी है. पाकिस्तान जानकारी ने कहा, ‘अफगानिस्तान में ऑपरेशन के लिए अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति से पाकिस्तान के इनकार को पूरी तरह सत्य नहीं माना जाना चाहिए. जैसा कि उन्होंने पहले अल कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन की उपस्थिति से भी इनकार किया था. अमेरिका क्यों नहीं चाहता कि भारत संसद और कालुचक हमले के बाद इस्लामाबाद को जवाब दे, क्योंकि 9/11 हमले के बाद अमेरिकी विशेष बलों की मौजूदगी पाकिस्तान में है. साल 2002 में यह बाद अमेरिका के तत्कालीन रक्षामंत्री डोनाल्ड रम्सफेल्ड की तरफ से कही गई थी.’

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