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दिल्ली के गुरुद्वारा रकाब गंज में 400 बेड का अस्थायी अस्पताल शुरू

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नई दिल्ली, देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की लगातार बढ़ती तादाद के बीच मरीजों के लिए अस्थायी अस्पताल तैयार करने की मुहिम भी तेज हो गई है. सोमवार को सेंट्रल दिल्ली के रकाब गंज गुरुद्वारा के प्रार्थना स्थल के दरवाजे कोरोना संक्रमितों के लिए खोल दिए गए. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी और दिल्ली सरकार ने साथ मिलकर नए कोरोना अस्पताल में सुविधाओं का इंतजाम किया है. रकाब गंज गुरुद्वारा में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए 400 बेड की व्यवस्था की गई है. सभी 400 बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है. यहां भर्ती होने वाले कोरोना संक्रमित को जरूरत के मुताबिक 5 लीटर से 20 लीटर तक ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की सुविधा एक बेड पर मिल सकती है. हाल ही में महानायक अमिताभ बच्चन ने भी इस ट्रीटमेंट सेंटर के लिए 2 करोड़ रुपये दान दिए हैं. सोमवार को रकाब गंज गुरुद्वारा में बने कोविड सेंटर का दौरा करने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और एलएनजेपी अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर सुरेश कुमार भी पहुंचे. गुरुद्वारा में कोरोना संक्रमितों का उपचार शुरू किए जाने से पहले स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, गुरुद्वारा सिख प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा समेत प्रबंधक कमेटी से जुड़े तमाम लोगों ने अरदास भी की. रकाब गंज गुरुद्वारा में बने अस्थायी अस्पताल को “श्री गुरु तेग बहादुर कोविड-19 मेडिकल आइसोलेशन और ट्रीटमेंट सेंटर” का नाम दिया गया है. दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने ‘आजतक’ से बातचीत में कहा कि किसी भी कोरोना संक्रमित को कहीं फोन करने की जरूरत नहीं होगी. परिजन सीधे रकाब गंज के ट्रीटमेंट सेंटर पर आकर एडमिशन करवा सकते हैं. मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि श्रीगुरु तेग बहादुरजी के 400 साल के प्रकाश पर्व के मौके पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अस्थायी अस्पताल तैयार किया है. इस आइसोलेशन एंड ट्रीटमेंट सेंटर का नाम भी श्रीगुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा गया है और यहां 400 बेड की व्यवस्था भी इसीलिए की गई है. मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि ये एक सेमी हॉस्पिटल है जो गुरु साहब की कृपा से तैयार किया गया है. आर्मी को छोड़कर किसी के लिए भी 10 दिन में 400 बेड का अस्पताल तैयार करना असंभव था. कोरोना महामारी के समय में जब लोग कई गुना अधिक कीमत पर ऑक्सीजन सिलेंडर बेच रहे हैं तब के समय में चार गुना कीमत में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर यहां देकर जाते हैं। सिरसा ने बताया कि इस ट्रीटमेंट सेंटर में 5 लीटर, 10 लीटर और 20 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के लिए भी इंतजाम है. बता दें कि इस अस्थायी अस्पताल को सेंट्रल दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल से जोड़ा गया है. रकाब गंज गुरुद्वारा में 400 के अलावा एहतियातन 130 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था भी की गई है. रकाब गंज गुरुद्वारा में बने कोरोना सेंटर के लिए हरमीत सिंह कालका को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्होंने बताया कि अगर ट्रीटमेंट सेंटर पर कोरोना का कोई मरीज गंभीर रूप से बीमार हो जाता है तो गुरुद्वारा में मौजूद एम्बुलेंस की मदद से उस मरीज को नजदीकी एलएनजेपी अस्पताल में पहुंचाया जाएगा.
सेमी आईसीयू बेड का भी है इंतजाम
इस अस्थायी अस्पताल में चार सेमी आईसीयू बेड का इंतजाम भी किया गया है. किसी भी मरीज की स्थिति बिगड़ने पर सेमी आईसीयू बेड की मदद ली जाएगी. रकाब गंज गुरुद्वारा में कोरोना मरीजों को शिफ्ट करने के लिए 15 एम्बुलेंस का इंतजाम किया गया है. ट्रीटमेंट सेंटर में दवाई, इलाज और एम्बुलेंस की सुविधा भी पूरी तरह से मुफ्त होगी यानी कोरोना संक्रमितों को किसी भी तरह का चार्ज नहीं देना होगा. साथ ही, गुरुद्वारा में कोरोना संक्रमितों को भर्ती कराने के लिए जरूरी है कि मरीज का ऑक्सीजन लेवल 85 से कम न हो. मनजिंदर सिंह सिरसा ने ‘आजतक’ से कहा कि गुरुद्वारा के कोविड सेंटर पर ऐसा कोई प्रोटोकॉल नहीं बनाया गया है जिससे मरीज की परेशानी बढ़े क्योंकि मरीज को तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत होती है. दरअसल, रकाब गंज गुरुद्वारा में अस्पताल का माहौल धार्मिक और सकारात्मक रहता है. जबकि अस्पताल का माहौल देखकर मरीज घबरा भी जाता है. जब गुरुवाणी और कीर्तन मरीज के कान में जाता है तो उसे लगता है कि परमात्मा के घर में खड़े हैं तो परमात्मा ही बचाएगा.
एक शिफ्ट में 25 डॉक्टर तैनात
इस अस्थायी अस्पताल के नोडल अधिकारी हरमीत सिंह कालका ने ‘आजतक’ को बताया कि सेंटर पर हर 8 घंटे की यानी एक शिफ्ट में 25 डॉक्टर और 40 पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी होगी. हर शिफ्ट में करीब 10 हाउस कीपिंग स्टाफ और 10 सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात होंगे. इसके अलावा कोरोना संक्रमितों और उनके परिजन के लिए भोजन की व्यवस्था भी गुरुद्वारा कमेटी की ओर से की गई है. कोरोना मरीजों के लिए डॉक्टर की सलाह के मुताबिक भोजन बनाया जाएगा. भोजन बनाने के लिए गुरुद्वारा कमेटी ने 10 लोगों की टीम भी बनाई है. साथ ही, हर 4 घंटे की शिफ्ट में 20-20 सिख वॉलेंटियर्स कोरोना संक्रमितों और उनके परिजनों की देखभाल के लिए भी तैनात किए जाएंगे.

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