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यूएई में मुलाकात कर सकते हैं भारत और पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री, दोनों देशों ने किया है खंडन

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नई दिल्‍ली। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबु धाबी पहुंच रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्री की यह यात्रा इसलिए खास है, क्‍योंकि इस दौरान पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी तीन दिन के यूएई के दौरे पर हैं। ऐसे में यह कयास लगाया जा रहा है कि दोनों देशों के विदेश मंत्री बड़े मुद्दों को लेकर मुलाकात कर सकते हैं। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्‍योंकि कुछ दिनों पूर्व यूएई के वरिष्‍ठ राजनयिक ने भारत और पाकिस्‍तान के बीच रिश्‍तों को सुधारने में अपनी भूमिका का जिक्र किया था। ऐसे में यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि जयशंकर और कुरैशी इस दौरान मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, दोनों देशों ने इसका खंडन किया है।

जयशंकर का यह दौरा पूरी तरह से द्विपक्षीय

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री कुरैशी की तीन दिवसीय यात्रा शुरू होने के कुछ घंटें पहले ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने घोषणा की कि जयशंकर 18 अप्रैल को अबुधाबी पहुंच रहे हैं। उन्होंने ट्वीट के जरिए बताया कि विदेश मंत्री अपने समक्ष शेख अब्दुल्लाह बिन जायद अल नाह्यान के आमंत्रण पर यूएई पहुंच रहे हैं।

जयशंकर आर्थिक और कोविड-19 से जुड़े मुद्दों पर वार्ता करेंगे

प्रवक्ता ने बताया कि जयशंकर की मुलाकात यूएई में गणमान्य लोगों के साथ है। विदेश मंत्री वहां पर आर्थिक और कोविड-19 से जुड़े मुद्दों पर वार्ता करेंगे। उधर, पाकिस्‍तान की ओर से कहा गया है कि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के इस दौरे में ऐसी किसी भी तरह की बैठक तय नहीं है। खास बात है कि कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच रिश्ते तल्ख हैं।

अमेरिका में यूएई के राजदूत ने कही ये बात

उधर, अमेरिका में इस यात्रा के चार दिन पूर्व यूएई के राजदूत यूसेफ अल-ओतैबा ने कहा कि उनके देश ने भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव को कम करने तथा और उनके द्विपक्षीय संबंधों को स्वस्थ कामकाजी स्तर पर वापस लाने में एक अहम भूमिका निभाई है। अल-ओतैबा ने एक डिजिटल चर्चा में कहा था कि वे शायद बहुत अच्छे दोस्त नहीं बन सकते, लेकिन हम इसे कम से कम ऐसे स्तर पर पहुंचाना चाहते हैं, जहां वे एक-दूसरे से बात करते हों। बता दें कि भारत और पाकिस्तान ने 25 फरवरी को एक अचानक की गयी घोषणा में कहा था कि वे जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने पर सहमत हुए हैं।

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