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कमलेश तिवारी की तरह मेरी हत्या होनी तय, लेकिन अपनी बात पर अभी भी कायम : स्वामी यति नरसिम्हानंद

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  • दिल्ली के प्रेस क्लब में दिए एक बयान के कारण चर्चा में आये स्वामी यति नरसिम्हानंद, बयान पर दर्ज हो चुकी है एफआईआर
  • स्वामी यति ने कहा- भारत शास्त्रार्थ करने वाला देश
  • स्वामी के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए आप विधायक अमान्तुल्लाह खान पर भी दर्ज हो चुकी है एफआईआर

नई दिल्ली। दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक अप्रैल को हुए एक कार्यक्रम के दौरान एक धर्म विशेष पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले स्वामी यति नरसिम्हानंद ने अपनी हत्या की आशंका जताई है। उन्होंने कहा है कि हिन्दू धर्म की आवाज उठाने के कारण जिस तरह लखनऊ के कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई, उसी प्रकार एक दिन उनकी भी हत्या कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उनके डासना मंदिर की सुरक्षा में ठोस कदम नहीं उठाया होता तो अब तक उनकी हत्या की जा चुकी होती। उन्होंने कहा कि अपनी कही गई बात पर वे अब भी कायम हैं और वे आगे भी इस तरह की आवाज उठाते रहेंगे। स्वामी यति का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद उस पर विवाद पैदा हो गया और उनकी गिरफ्तारी की मांग की जाने लगी। दिल्ली पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए इस मामले में शनिवार को संसद मार्ग थाने में एक एफआईआर दर्ज कर ली है।

राम, कृष्ण और गीता पर चर्चा हो सकती है तो अन्य धर्म पर क्यों नहीं

स्वामी यति नरसिम्हानंद ने कहा कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के कायक्रम के दौरान उन्होंने केवल यही बात कही थी कि भारत शास्त्रार्थ करने वाली संस्कृति का देश है। यहां भगवान राम, कृष्ण से लेकर हिन्दुओं की सबसे पवित्र धर्मग्रन्थ गीता पर भी शास्त्रार्थ और चर्चा होती है। हिन्दुओं की आराध्य देवी भगवती दुर्गा के आपत्तिजनक चित्रण को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता करार दी जाती है, तो इसी देश में किसी अन्य धर्म के प्रमुख या धार्मिक ग्रन्थ पर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए।

धार्मिक पुस्तकों का बारिकी से अध्ययन करें अनुयायी

उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि लोग अपने ही धर्म ग्रंथों और उसके पैगम्बरों की जिंदगी, अपनी धार्मिक पुस्तकों का बारिकी से अध्ययन करें और उस पर खुलकर चर्चा करें। इससे वे समझ सकेंगे कि उनका धर्म किस प्रकार के लोगों के द्वारा संचालित किया गया है और उनके धर्म ग्रंथों में क्या बातें कही गई हैं। अगर लोग इन बातों को समझेंगे, तो वे ज्यादा बेहतर ढंग से अपने धर्म को समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी दूसरे के लिए नहीं, बल्कि उसी धर्म का पालन करने वाले लोगों के हित में है कि वे अपनी धार्मिक पुस्तकों में कही गई बातों का गंभीरतापूर्वक अध्ययन करें और सोचें कि क्या आज के समय में ये बातें उचित हैं।

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