Home देश धर्मांतरण पर रोक के लिए केंद्र सरकार बनाए सख्त कानून : विहिप

धर्मांतरण पर रोक के लिए केंद्र सरकार बनाए सख्त कानून : विहिप

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  • षडयंत्रकारियों के पकड़े जाने से राष्ट्रव्यापी जाल का हुआ पर्दाफाश

नई दिल्ली ब्यूरो

दिल्ली के जामिया नगर से धर्मांतरण के षड्यंत्रकारियो के पकड़े जाने से इसके राष्ट्रव्यापी जाल का पर्दाफाश हो गया है। इससे इसके पीछे लगे लोगों की मानसिकता भी उजागर हो गई है। विश्व हिन्दू परिषद ने धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की है। ताकि धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।

विहिप ने कहा कि धर्मांतरण कराने वाले भोले और मासूम लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। इतना ही नहीं वह मूक-बधिर बालकों को भी निशाना बनाने का अमानवीय अपराध करते हैं। इनमें से कई बच्चे तो लापता हैं। इनको आतंकी गतिविधियों में शामिल किए जाने की आशंका है। इनको विदेशों से भी पैसा मिल रहा है, मुस्लिम समाज का एक वर्ग इनका समर्थन भी कर रहा है। इसीलिए बिना तथ्यों के जाने एक मुस्लिम नेता ने इनको निरपराध घोषित कर दिया।

विहिप ने कहा कि हो सकता है इनके बचाव के लिए ये लोग बड़ी-बड़ी फीसें देकर बड़े वकीलों की एक फौज भी खड़ी कर दे जैसा ये पहले भी करते रहे हैं। इनका यह षड्यंत्र आज का नहीं है। इस्लाम के भारत में प्रवेश के साथ ही धर्मांतरण का कुचक्र शुरू हो गया था। इस षड्यंत्र का स्वरूप राष्ट्रव्यापी है तथा इसके कई रूप सामने आ चुके हैं। इसीलिए एक न्यायपालिका ने कहा था कि लव जिहाद धर्मांतरण का सबसे घिनौना रूप है। कोरोना काल में पीड़ितों की सहायता के लिए संपूर्ण देश पूर्ण समर्पण के साथ जुटा है परंतु, जेहादी और मिशनरी अपने इस घिनौने एजेंडे को लागू करने में लगे हैं।

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून होने के कारण इनका यह गिरोह पकड़ा गया परंतु जहां यह कानून नहीं है, वहां तो, इनके लिए मैदान खुला है। टूल किट गैंग इनकी सहायता के लिए तत्पर रहता ही है। विहिप का मत है कि अब धर्मांतरण के इस घिनौने स्वरूप की व्यापक जांच के लिए नियोगी कमीशन जैसा जांच आयोग बनाना चाहिए जिसका कार्यक्षेत्र संपूर्ण देश हो।

नियोगी कमीशन और वेणु गोपाल कमीशन ने धर्मांतरण विरोधी केंद्रीय कानून बनाने की सिफारिश की थी। संविधान सभा के कई सदस्य भी इसी मत के थे। इसलिए केंद्र सरकार को अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए एक कानून बनाने पर विचार करना चाहिए। धर्मांतरण के कारण देश विभाजन की एक त्रासदी झेल चुका है और जेहादी आतंकवाद की पीड़ा का सामना कर रहा है।

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