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स्वदेशी लैपटॉप और कंप्यूटर को मिलेगा बढ़ावा, PLI स्कीम को मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

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नई दिल्ली। सरकार ने लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पीसी तथा सर्वर के विनिर्माण को प्रोत्साहन के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है। पीएलआई योजना के जरिए सरकार का इरादा घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने का है। इन हाई-टेक आईटी हार्डवेयर गैजट्स के लिए पीएलआई योजना को हरी झंडी से पहले पिछले सप्ताह केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार उपकरण विनिर्माण के लिए 12,195 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी थी।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि मंत्रिमंडल ने आईटी हार्डवेयर के लिए 7,350 करोड़ रुपए की पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पीसी और सर्वर आएंगे।
प्रसाद ने कहा कि यह योजना भारत को इन उत्पादों के बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में पेश करेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। योजना के तहत चार साल के दौरान भारत में इन उत्पादों के विनिर्माण के लिए 7,350 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन दिया जाएगा। चार साल में इन उत्पादों का विनिर्माण 3.26 लाख करोड़ रुपए और निर्यात 2.45 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है।

स्वदेशी लैपटॉप और कंप्यूटर को मिलेगा बढ़ावा, PLI स्कीम को मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। सरकार ने लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पीसी तथा सर्वर के विनिर्माण को प्रोत्साहन के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है। पीएलआई योजना के जरिए सरकार का इरादा घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने का है। इन हाई-टेक आईटी हार्डवेयर गैजट्स के लिए पीएलआई योजना को हरी झंडी से पहले पिछले सप्ताह केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार उपकरण विनिर्माण के लिए 12,195 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी थी।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि मंत्रिमंडल ने आईटी हार्डवेयर के लिए 7,350 करोड़ रुपए की पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पीसी और सर्वर आएंगे।
प्रसाद ने कहा कि यह योजना भारत को इन उत्पादों के बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में पेश करेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। योजना के तहत चार साल के दौरान भारत में इन उत्पादों के विनिर्माण के लिए 7,350 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन दिया जाएगा। चार साल में इन उत्पादों का विनिर्माण 3.26 लाख करोड़ रुपए और निर्यात 2.45 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है।

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