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बंगाल विधानसभा चुनाव: अन्याय और अत्याचार से बंगाल को मुक्ति दिलाना है : गोवर्धन दास

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कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हस्तियों के साथ-साथ गैर राजनीतिक व्यक्तित्व भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें फिल्मी सितारों के अलावा चिकित्सा, खेल, विज्ञान और तकनीकी से जुड़े लोग भी शामिल हैं। इन्हीं में से एक हैं पूर्व बर्दवान जिले की उत्तर पूर्वस्थली विधानसभा सीट के भाजपा उम्मीदवार गोवर्धन दास, जो एक जाने-माने वैज्ञानिक हैं एवं वर्तमान में जेएनयू में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्राध्यापक के तौर पर कोरोना प्रतिरोधक तैयार करने को लेकर हो रहे शोध का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका शोध अंतिम चरण में है। चुनाव में व्यस्त होने के कारण काम रुका हुआ है। अगर इसमें सफलता मिलती है तो हमारा वैक्सीन लेने वालों को जीवन भर कोरोना होने का खतरा नहीं रहेगा।

बहरहाल, गोवर्धन दास अपनी शोध से ज्यादा चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर चर्चा में हैं। अपने काम के सिलसिले में 12 वर्षों तक अमेरिका में रहे गोवर्धन दास ने 2014 में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक तौर पर काम शुरू किया। तकरीबन 15 वर्षों से वे यक्ष्मा टीके को लेकर शोध करते आ रहे हैं। उनकी पत्नी इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की वैज्ञानिक हैं जबकि उनकी बेटी दिल्ली में एमबीबीएस कर रही हैं। पहली बार राजनीति के संपर्क में आते ही उन्हें चुनाव में किस्मत आजमाने का मौका मिल गया।

जीवन के शुरुआती दौर के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि उनके पिता एक साधारण किसान थे। उनका बचपन बेहद अभाव में गुजरा। नवद्वीप के एक स्कूल से उच्च माध्यमिक उत्तीर्ण करने के बाद विश्व भारती से रसायन शास्त्र में ऑनर्स किया, तदुपरांत जेएनयू से बायो टेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और फिर चंडीगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी से पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद 1997 से 2012 तक अमेरिका में रहकर काम किया। अचानक राजनीति में आने के सवाल पर गोवर्धन दास ने कहा कि हमारे परिवार में कभी किसी ने राजनीति नहीं की। हम पांच भाई हैं। एक वक्त था जब हम भाईयों के पैरों में चप्पल भी नहीं हुआ करते थे। ऐसी बदहाल अवस्था से ऊपर आया हूं। चुनाव से तकरीबन एक साल पहले मुझे लगा कि मेरे क्षेत्र का कायाकल्प होना चाहिए। पश्चिम बंगाल अन्य राज्यों की तुलना में काफी पिछड़ा हुआ है। यह भी समझ आ गया कि राजनीति के मैदान में उतरे बगैर कुछ नहीं किया जा सकता, इसीलिए राजनीति में आया।”

मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ प्रचार अभियान की शुरुआत करने वाले गोवर्धन दास ने बताया कि उन्होंने ईश्वर से बंगाल को अन्याय और अत्याचार से मुक्त करने की प्रार्थना की। वह घर-घर जाकर लोगों से जनसंपर्क कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल का चेहरा कलुषित हो गया है। कल कारखाने, शिक्षा व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था सब कुछ बदहाल है? इस हालत से बंगाल को मुक्ति दिलाना है।

चुनाव में जीत की संभावनाओं के बारे में पूछने पर उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी जीत के दावे करते हुए कहा कि इस इलाके के मिट्टी के कण-कण से मैं वाकिफ हूं। प्रचार अभियान के दौरान एहसास हुआ कि लोग परिवर्तन चाहते हैं इसीलिए दोनों हाथ उठाकर मुझे आशीर्वाद देते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्वस्धली (उत्तर) विधानसभा में भाजपा को 2705 वोटों की बढ़त मिली थी। गोवर्धन कहते हैं कि इस बार यहां वोटों का अंतर 30,000 से अधिक रहेगा और भाजपा पूर्वस्थली के साथ पूरे बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीतने में सफल रहेगी। इस सीट पर उन्हें तृणमूल के तपन चटर्जी तथा माकपा के प्रदीप साहा से चुनौती मिल रही है। 22 अप्रैल को छठे चरण में पूरबास्थली उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मतदान होगा।

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