Home देश पुलिस में महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकते हैं 33 फीसदी पद

पुलिस में महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकते हैं 33 फीसदी पद

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  • संसदीय समिति ने कहा- राज्यों को महिलाओं से संबंधित निर्देश जारी करे केंद्रीय गृह मंत्रालय
  • पुलिस में महिलाओं की न्यूनतम भागीदारी से खफा संसदीय समिति

नई दिल्ली ब्यूरो

महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध को देखते हुए संसदीय समिति ने कड़ा रूख अख्तियार किया है। संसदीय समिति ने पुलिस में महिलाओं से जुड़े अपराध की संख्या में कमी को लेकर राज्यों पर तल्ख टिप्पणी की है। समिति ने कहा है कि पुलिस सेवा में महिलाओं की पर्याप्त संख्या न होने की वजह से थाने में महिलाएं जाना पसंद नहीं करती है। पुलिस सेवा में महिलाओं की संख्या कम से कम 33 प्रतिशत करने के लिए गृहमंत्रालय राज्यों को निर्देश देने की अनुशंसा संसदीय समिति ने की है। माना जा रहा है कि देश भर में जल्द ही महिलाओं के लिए पुलिस में 33 फीसदी पद आरक्षित हो सकते हैं।
गृहमंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति के अनुसार देश में पुलिस सेवा में महिलाओं की भागीदारी मात्र 10.30 फीसदी है। जबकि गृहमंत्रालय पुलिस सेवा में 33 फीसदी महिलाओं की भागीदारी के संबंध में दिशा निर्देश जारी कर चुका है। इसके बावजूद राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में इसे अमल में नहीं लाया जा रहा है। संसदीय समिति ने गृहमंत्रालय को कहा है कि राज्यों को इस बाबत तल्ख निर्देश दिया जाए। इसके लिए विशेष बहाली प्रक्रिया अपनाई जाए।

सभी राज्यों में तीन अंको का एक ही हो हेल्पलाइन नंबर

राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में महिलाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर अलग—अलग होने से संसदीय समिति ने नाराजगी जाहिर की है। लंबे चौड़े और अलग—अलग हेल्पलाइन नंबर होने से महिलाओं को इसे याद रखना मुश्किल होता है। ऐसे में मुश्किल समय में महिलाएं इस हेल्पलाइन नंबर का इस्तेमाल नहीं कर पाती है। संसदीय समिति ने तीन अंकों की हेल्पलाइन नंबर जारी करने को कहा है। इतना ही नहीं यह तीन अंको का हेल्पलाइन नंबर सभी राज्यों में एक जैसा हो। समिति ने महिलाओं के लिए सभी राज्यों में 112 हेल्पलाइन नंबर बनाने का निर्देश दिया है।

निर्भया फंड के दुरूपयोग पर नाराजगी

संसदीय समिति ने महिलाओं की मदद के लिए बनाए गए निर्भया फंड के दुरूपयोग पर नाराजगी जाहिर की है। समिति ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि निर्भया फंड को दूसरी परियोजनाओं में लगा दिया गया है। यह सही नहीं है, इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। निर्भया फंड का इस्तेमाल महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े योजनाओं पर खर्च किया जाना चाहिए।

चलती ट्रेन में भी महिलाओं को एफआईआर दर्ज कराने का हो प्रावधान

संसदीय समिति ने रेलवे को निर्देश दिया है कि चलती ट्रेन में भी महिलाओं को अपनी प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रावधान करे। साथ ही इस प्रावधान का मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार भी करे।

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