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भारत ने रखा आईएनएसटीसी मार्ग में चाबहार को शामिल करने का प्रस्ताव

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नई दिल्ली । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि ईरान स्थित चाबहार पोर्ट ने थोड़े समय में ही मध्य एशिया सहित रूस, ब्राजील, थाईलैंड, जर्मनी, यूक्रेन और यूएई से जुड़े शिपमेंट और ट्रांस-शिपमेंट को संभालने में अपनी विश्वसनीयता और प्रासंगिकता साबित की है। भारत ने ‘इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी)’ में चाबहार को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। मैरीटाइम इंडिया समिट में चाबहार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि बंदरगाह न केवल क्षेत्र के लिए एक वाणिज्यिक पारगमन केंद्र के रूप में उभरा है, बल्कि इसने खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान मानवीय सहायता के वितरण को भी सुविधाजनक बनाया है। बंदरगाह अफगानिस्तान के लोगों की शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता का हिस्सा है। विदेश मंत्री ने चाबहार जैसे विदेशी बंदरगाह में निवेश को उल्लेखनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि चाबहार पर काफी समय से चर्चा चल रही थी, लेकिन 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान ही इससे जुड़े त्रिपक्षीय (भारत, ईरान और अफगानिस्तान) समझौते पर हस्ताक्षर हुए। उन्होंने कहा कि इस परिवहन और पारगमन गलियारे का उद्देश्य पूरे क्षेत्र में वाणिज्यिक गतिविधियों के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही अफगानिस्तान और बाद में पूरे मध्य एशिया के लिए व्यापार का एक सुरक्षित और विश्वसनीय मार्ग तैयार करना है। विदेश मंत्री ने कहा कि चाबहार दिवस क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने और बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशियाई देशों को समुद्र तक पहुंच प्रदान करने के लिए सभी क्षेत्रीय हितधारकों के साथ मिलकर काम करने की भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने चाबहार को इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) में शामिल करने का भी प्रस्ताव दिया है। उन्हें उम्मीद है कि इससे जुड़े बाकी देश भी इसका समर्थन करेंगे। आईएनएसटीसी एक महत्वपूर्ण व्यापार गलियारा परियोजना है, जिसमें भारत आर्थिक गलियारा स्थापित करने के लिए 12 देशों के साथ साझेदारी कर रहा है। इस दौरान जयशंकर ने बहुपक्षीय गलियारे परियोजना में शामिल होने के लिए उज्बेकिस्तान और अफगानिस्तान का स्वागत किया।

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