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तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन पर 24 घंटे के भीतर ही भारत का जोरदार पलटवार

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान तुर्की ने भारत को कश्मीर पर घेरने की कोशिश की तो भारत ने भी इस देश को कड़ा जवाब दिया है. दरअसल तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में अपने भाषण के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठा दिया था. इसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी साइप्रस के मुद्दे को छेड़ दिया.
नई दिल्ली ,
संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान तुर्की ने भारत को कश्मीर पर घेरने की कोशिश की तो भारत ने भी इस देश को कड़ा जवाब दिया. दरअसल तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में अपने भाषण के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठा दिया था. इसके कुछ ही घंटे बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी साइप्रस के मुद्दे को छेड़ दिया. गौरतलब है कि तुर्की ने कई सालों पहले साइप्रस के एक बड़े हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था. इस मुद्दे पर यूएन के प्रस्ताव की भी तुर्की अनदेखी करता रहा है. एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में कहा कि हम इस बात पर अब भी कायम हैं कि कश्मीर में 74 सालों से जारी समस्या को दोनों देशों को संवाद के जरिए सुलझाना चाहिए और इसे यूएन के प्रासंगिक प्रस्तावों के जरिए सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए. एर्दोगन ने साल 2019 में भी अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाया था. उस समय पीएम नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनास्तासीदेस के साथ बैठक की थी और इस द्वीप राष्ट्र की ‘स्वतंत्रता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एकता’ के लिए समर्थन की बात दोहराई थी. साइप्रस ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सीट के दावे का समर्थन किया था.
एर्दोगन के बयान के बाद साइप्रस के विदेश मंत्री से मिले जयशंकर
वहीं, एर्दोगन के बयान के बाद एस जयशंकर ने साइप्रस के विदेश मंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की. इस दौरान उन्होंने साइप्रस के संबंध में यूएन के प्रासंगिक प्रस्तावों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया. जयशंकर ने अपनी मुलाकात को लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि हम आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं और सभी को साइप्रस के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों का पालन करना चाहिए.
कई देशों के विदेश मंत्रियों से की जयशंकर ने मुलाकात
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में भाग लेने के लिए जयशंकर सोमवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे. उन्होंने यूके, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, नॉर्वे, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे कई देशों के समकक्षों के साथ कम से कम 18 द्विपक्षीय बैठकें कीं. जयशंकर ने दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चुंग यूई-योंग से मुलाकात की और भारत की एक्ट ईस्ट नीति और दक्षिण कोरिया की नई साउथ पॉलिसी के साथ-साथ भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को लेकर व्यापक बातचीत की. इसके अलावा उन्होंने इटली के विदेश मंत्री लुईगी डि माओ के साथ वैक्सीन की उपलब्धता और पहुंच के अलावा भारत और इटली के बीच सुगम यात्रा से जुड़ी चुनौतियों पर बातचीत की.
क्या है तुर्की साइप्रस विवाद
तुर्की के दक्षिण में और इजरायल के उत्तर पश्चिम में स्थित साइप्रस एक द्वीप देश है. इस देश में तुर्क और ग्रीक रहते हैं. दोनों समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद रहा है. साल 1974 में ग्रीक लड़ाकों की तरफ से तख्तापलट की कोशिश की गई थी जिसके बाद तुर्की की सेना ने साइप्रस पर हमला कर दिया था और साइप्रस के मशहूर शहर वरोशा को कब्जे में ले लिया था. ये शहर पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय था और इस मल्टीकल्चरल जगह पर काफी लोग आते थे लेकिन ये जगह पिछले कई दशक से वीरान पड़ी है. तुर्की ने अपनी सेना के 35 हजार सैनिकों को इस क्षेत्र में तैनात किया हुआ है. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन का कहना है कि साइप्रस विवाद का तब तक हल नहीं हो सकता जब तक कि ये स्वीकार न किया जाए कि वहां दो समुदाय हैं और दो सरकारें (देश) हैं.
भारत, साइप्रस में शांतिपूर्ण समाधान की लगातार करता रहा है वकालत
इस घटना के बाद से ही ये द्वीप दो हिस्सों में बंटा है. ग्रीक साइप्रस सरकार को संयुक्त राष्ट्र समेत कई देश स्वीकारते हैं वहीं, तुर्कों ने साइप्रस के तुर्क बहुल इलाके को एक स्वघोषित देश का दर्जा दिया है जिसे सिर्फ तुर्की मान्यता देता है. गौरतलब है कि साल 1998 के प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सभी देशों से साइप्रस गणराज्य की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही थी. संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से इस द्वीप में एकीकरण के प्रयास कर रहा है लेकिन उसे सफलता हासिल नहीं हो पाई है. भारत भी लगातार यूएन के प्रस्तावों के तहत इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है.

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