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कोरोना की तीसरी लहर का आंकलन कराने के बाद होगा नगरीय निकाय चुनाव

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-15 सितंबर के बाद निकाय चुनाव कराने पर अभी कोई निर्णय नहीं

विशेष संवाददाता, भोपाल

प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर का पूरा आंकलन, विशेषज्ञों की राय और कोरोना को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा तीसरी लहर को लेकर किए जाने वाले अध्ययन का पूरा आंकलन कराने के बाद ही राज्य सरकार नगरीय निकाय चुनाव कराएगी। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा यह जवाब मंगलवार को जबलपुर उच्च न्यायालय में मप्र नागरिक उपभोक्ता मंच की याचिका में दिया गया हे।

मंच ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग 15 सितंबर के बाद नगरीय निकाय चुनाव कराने को लेकर तैयारी बैठक ली है, जबकि चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में कोरोना काफी फैला है। विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सितंबर में कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी जारी की है। ऐसे में अगर 15 सितंबर के बाद निकाय चुनाव कराए जाते हैं और उसी समय कोरोना की तीसरी लहर आई तो प्रदेश में जनहानि होने की आशंका बनी रहेगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने जवाब पेश कर बताया कि अभी सीमांकन, आरक्षण और महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कराने को लेकर कई याचिकाएं उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। आयोग तीसरी लहर के आंकलन और राज्य सरकार की सहमति के बाद ही चुनाव कराएगा। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस जवाब के साथ ही इस मामले में दायर की गई याचिका को निराकरण कर दिया है।

मंच ने इन राज्यों का दिया हवाला

उपभोक्ता मंच ने उच्च न्यायालय में पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में हुए चुनाव और उप्र के पंचायत चुनाव का हवाला दिया गया था। आशंका जताई गई थी कि अगर ये चुनाव होते हैं, तो प्रदेश में पूरा सरकारी तंत्र इसमें व्यस्त हो जाएगा। ऐसे में अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है तो हालात बेहद खतरनाक हो सकते हैं। हाईकोर्ट के जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की डबल बेंच में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से यहां उप महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव ने वहीं राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने पक्ष रखा है।

क्या है पूरा मामला

उच्च न्यायालय में यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने दायर की थी। याचिका कर्ताओं की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने की। याचिका में कहा गया था कि राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 जुलाई को बैठक कर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत राज्य में 15 सितंबर से 347 नगरीय निकायों और दिसंबर से प्रदेश में पंचायतों के चुनाव की तैयारी शुरू करने को कहा गया है।

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