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भोपाल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज शिफ्टिंग के मनमाने रेट; 10 किलाेमीटर की दूरी के किसी ने 1200 बताए तो कोई बोला- 3 हजार रुपए

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मध्यप्रदेश सरकार ने कोरोना मरीजों के लिए प्राइवेट एंबुलेंस वालों के रेट तय कर दिए हैं, लेकिन हकीकत में 5 से 6 गुना तक मरीजों से वसूले जा रहे हें। दैनिक भास्कर ने भोपाल में एंबुलेंस के 3 संचालकों से एक जगह से दूसरी जगह जाने के रेट पूछे तो तीनों ने अलग बताए।

इनसे पूछा गया था कि नर्मदा अस्पताल से हमीदिया में ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ मरीज को ले जाने का कितना किराया लगेगा? किसी ने 1200 रुपए तो किसी ने 2500 रुपए तो तीसरे ने 3 से 4 हजार रु. किराया बता दिया। इन दोनों अस्पतालों के बीच दूरी 10 किलोमीटर है।

जब भास्कर ने सवाल किया कि यह रेट तय करने का आधार क्या है तो वे दलीलें देने लगे। एक ने कहा, सरकार ने जो रेट तय किए हैं, उसका पता नहीं। 500 रुपए की तो ऑक्सीजन ही लग जाती है। ड्राइवर खर्च, पीपीई किट, सैनिटाइजर और डीजल की राशि अलग है।

ALS और BLS के तय रेट भी कम

यह हालत तब है जब सरकार ने बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस का किराया बढ़ा दिया है। सरकार ने शहरी क्षेत्र के लिए एएलएस के लिए पहले 10 किमी के 500 रुपए और उसके बाद 25 रुपए प्रति किमी तय किया है। बीएलएस के लिए पहले 10 किमी के 250 रुपए और उसके बाद 20 रुपए किमी तय किया है। बावजूद इससे ज्यादा नार्मल एंबुलेंस के लिए रुपए वसूले जा रहे हैं।

मनोज सिंह, श्री राम एंबुलेस से बातचीत

– नर्मदा अस्पताल से कोविड मरीज को हमीदिया अस्पताल में शिफ्ट करना है?

  • अभी हमारे पास एंबुलेंस नहीं है। बाहर गई है। तीन बजे तक आएगी।

– कितना पैसा लगेगा?

  • ऑक्सीजन के साथ 1200 रुपए लगेंगे।

यह दी दलील

भास्कर ने मनोज सिंह से जब सीधी बात की तो बोले कि सरकार के रेट के बारे में कुछ नहीं कह सकते। 250 रुपए की तो ऑक्सीजन ही लग जाती है। इसके अलावा ड्राइवर और ईंधन का खर्च अलग है। ऐसे में 250 और 500 रुपए में एंबुलेंस कैसे चलेगी। दिल्ली सरकार ने भी ऑक्सीजन के साथ नार्मल गाड़ी का 1500 रुपए रेट तय किया है।

कमल अग्निहोत्री, सांई एंबुलेंस से रिपोर्टर की रिकॉर्डेड बातचीत

? नर्मदा अस्पताल से कोविड मरीज को हमीदिया में भर्ती करना है। कितना पैसा लगेगा?

  • वहां पर गाड़ी खड़ी होगी।

​​​​​​​? नहीं, हमें अपनी तरफ से करना है?

  • 2500 रुपए लगेंगे।

सीधी बात-

भास्कर ने सांई एंबुलेंस के कमल अग्निहोत्री से सीधी बात कि तो उन्होंने कहा कि सरकार ने बीएलएस और एएलएस एंबुलेंस किस आधार पर तय किए, यह समझ में नहीं आया। एक पेशेंट के ट्रांसपोर्टेशन में एंबुलेंस में ही ड्राइवर के पांच सौ रुपए, ऑक्सीजन, पीपीई किट पांच-पांच सौ रुपए की लगती है। डीजल का खर्चा अलग से। बीएलएस और एएलएस में स्टाफ के साथ अन्य उपकरण तो अलग से लगते है। हमें क्या बचेगा?

आलोक जैन, एके जैन एंबुलेंस सर्विस

? नर्मदा अस्पताल से कोविड मरीज को हमीदिया अस्पताल में भर्ती करना है।

  • छोड़ देंगे? पहले आप मरीज को निकालने से पहले हमीदिया अस्पताल में कंफर्म कर लीजिए। कुछ दिन पहले दो मरीज को लौटा दिया था। आप बाद में परेशान हो जाएंगे।

? हां, हमारी बात हो गई है। आप पैसा बता दीजिए।

  • ऑक्सीजन के साथ आपको 3 से 4 हजार रुपए लेगेंगे, लेकिन मैं फिर कह रहा हूं कि आप हमीदिया में एडमिशन के लिए कंफर्म कर लीजिए।

सीधी बात-

भास्कर ने आरके जैन एंबुलेंस सर्विसेस के ओलाक कुमार जैन से सीधी बात कि तो बोले कि हम तो छोटी गाड़ी चलाते है। ऑक्सीजन के लिए दूसरों को गाड़ी के लिए बोलते है। मैंने कुछ दिन पहले उनसे बात की तो उन्होंने 3 से 4 हजार रुपए ही रेट बताया था। हम तो मदद कर देते हैं। फिर कॉर्डियक एंंबुलेंस बड़ी होती है इसलिए खर्च भी ज्यादा होता है।

1075 पर करें शिकायत, कार्रवाई करेंगे

” यदि कोई मरीजों को शिफ्ट करने के लिए एबुलेंस संचालक ज्यादा पैसा मांग रहा है तो सीधे 1075 पर शिकायत करें। मनमानी करने वाले एंबुलेंस संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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