Home » भाव अभिनय से बताया शिव-पार्वती के पुत्र गणेश का आकर्षक स्वरूप

भाव अभिनय से बताया शिव-पार्वती के पुत्र गणेश का आकर्षक स्वरूप

शहीद भवन में नृत्य रंजनी समारोह शुरू

भोपाल। शहीद भवन में आयोजित दो दिवसीय नृत्य रंजनी समारोह में कथक की सुंदर प्रस्तुतियां हुईं। पद्मरंग और पुरू कथक नृत्य अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में क्षमा मालवीय के निर्देशन में शिष्याओं ने शुरुआत गणेश धु्रपद से की। इसमें भाव अभिनय के माध्यम से बताया गया कि  शिव- पार्वती के पुत्र गणेश,  जितना भव्य, सुंदर, आकर्षक उनका स्वरूप है उतनी ही दिव्यता उनके ज्ञान और गुणों की है। 

वे विद्या, बुद्धि और विनय के प्रतीक तो हैं ही, विघ्नों का नाश कर मंगल की प्रतिष्ठा करने वाले उदार देवता भी हैं। ऐसे विनायक हम सब के आराध्य गणेश को प्रणाम। गुंदेचा बंधु की यह रचना 10 मात्रा, राग भूपाली में निबद्ध रही। इसके बाद क्रमश: सरस्वती वंदना, मल्हार, तराना, कबीर, तिरवत, शिव स्तुति, संगीत नर्तन जैसे कथक रूपों को मंच पर पेश किया गया। संगीत नर्तन कथक नृत्य की प्राचीन परंपरा नृत्य संगीत है जिसमें नृत्य के बोलो को गाया जाता है। यह परंपरा आंशिक रूप से ब्रज की रासलीला में प्रचलित है।

कथक नृत्य के लखनऊ घराने में भी संगीत के टुकड़े नाम से कुछ बंदिशें प्रचलित हैं। इन्हीं से प्रेरित होकर सुमधुर प्राचीन परंपरा को पुन: प्रचारित करने की भावना से डा. पुरु दाधीच ने नृत्य संगीत नाम की इस बंदिश की रचना की है, जिसका स्वर संयोजन डा. पूर्विनीमगावकर ने किया है। यह रचना राग जन सम्मोहिनी में है जिसे पंडित रविशंकर ने बनाया है। हारमोनियम पर हर्षवर्धन भट्ट, तबला पर पवनसेन और पढंत पर डा. विभा दाधीच ने संगत की।

The attractive nature of Ganesha, the son of Shiva-Parvati, told through expressions.

Related News

Swadesh Bhopal group of newspapers has its editions from Bhopal, Raipur, Bilaspur, Jabalpur and Sagar in madhya pradesh (India). Swadesh.in is news portal and web TV.

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed by Sortd