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दूसरों को बचाने में खुद डूबा तैराक, शिप्रा नदी में डूब रहे महिला-पुरुष को बचाने के लिए कूदा, गहरे पानी में खुद डूब गया

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उज्जैन। शिप्रा नदी में डूब रहे मामी-भांजे को बचाने में बुधवार को एक युवा तैराक पंकज चावड़ा ने जान दांव पर लगा दी। उसने महिला को तो पहले सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन पुुरुष को बचाने के दौरान खुद गहरे पानी में चला गया। पास में खड़े अन्य तैराकों ने बेहोशी की हालत में उसे निकाला। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
महाराष्ट्र के जलगांव से हरीश पिता रामगोपाल परिवार के साथ महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आया था। उसके साथ औरंगाबाद के खामगांव निवासी उसकी मामी मंगलाबाई भी थी। हरीश ने बताया कि सुबह महाकाल और अन्य मंदिरों के दर्शन के बाद हम रामघाट आए थे। वहां मामी ने शिप्रा में डुबकी लगाने की इच्छा जताई। मामी नदी में उतर गईं। वह सीढ़ियों पर स्नान कर रही थीं कि अचानक पैर फिसलने से वह पानी में गिर गईं। इधर, हम सभी परिवार के साथ बातों में मशगूल थे, तभी किसी ने आवाज लगाई कि महिला डूब रही है। मैंने देखा कि मामी पानी में डूब रही थी। ये देख मैं बचाने के लिए पानी में कूद गया। मुझे भी तैरना नहीं आता था।
इसी बीच, वहां तैनात सिपाही मोहन सिंह परमार ने तैराक दल के सदस्यों को बुलाया। घाट पर मौजूद तैराक पंकज चावड़ा उर्फ गंभीर ने पानी में छलांग लगा दी। उसने मंगलाबाई को तो निकाल लिया। इसके बाद हरीश को बचाने के लिए जब दोबारा पानी में उतरा, तो खुद ही गहरे पानी में चला गया। उसे डूबता देख घाट पर खड़े अन्य तैराक पानी में उतर गए। उन्होंने हरीश और पंकज को निकाला। पंकज को अचेत अवस्था में बाहर लाया गया। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पहले कई लोगों को डूबने से बचा चुका है पंकज
दल में शामिल संतोष ने बताया कि पंकज अच्छा तैराक था। वह काफी समय से घाट पर सेवा दे रहा था। उसने कई बार लोगों को डूबने से बचाया है। ऐसा लगता है कि पानी में उसकी सांस फूलने लगी थीं। उधर, रामघाट पुलिस चौकी इंचार्ज मोहन सिंह परमार ने बताया कि पंकज के साथी तैराकों ने बताया कि उसे मिर्गी का दौरा पड़ता था। संभव है, पानी में उसे दौरा पड़ गया हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा।

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