Home भोपाल संत रविदास ने सेवाभाव को मूलमंत्र मानकर समरस समाज का किया कार्य

संत रविदास ने सेवाभाव को मूलमंत्र मानकर समरस समाज का किया कार्य

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स्वदेश संवाददाता। भोपाल सेवाभाव से किया जाने वाला कर्म ही समाज में समरसता का स्पंदन करता है। संत रविदास जी ने आजीवन इसी सेवाभाव को अपना मूलमंत्र मानकर समरस समाज बनाने के लिए कार्य किया। यह बात शनिवार 28 फरवरी को सेवा भारती प्रांतीय कार्यालय में आयोजित सेवा भारती मध्यभारत के वेबसाइट लोकार्पण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक गोरेलाल ने कही। कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार प्रकट करते हुए सेवा भारती के प्रांत सचिव विमल त्यागी ने वेबसाइट कार्य में लगे हुए कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए बताया कि आपके माध्यम से अब समाज में सकारात्मक खबरें पढ़ी जाएगी।
सेवा भारती का अतुलनीय योगदान
कार्यक्रम में समाजिक समरसता और सेवा भारती की कार्यपद्धति के विषय पर विशेष व्याख्यान देते हुए श्री खांडेकर ने बताया कि सेवा भारती मध्यभारत ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। लॉकडाउन के समय में सेवा भारती के कार्यकताओं के द्वारा किए गए सेवा कार्य हमें यह बताता है कि सेवा भारती ने पूरे समाज को अपना मानकरए समाज के लिए कार्य किया है। संत रविदास जी के सामाजिक समरसता के विचार और सेवा भारती के द्वारा किए गए कार्यों ने समाज को मजबूत और एकजुट किया हैए समाज को सशक्त प्रेरणा देते है।
कार्यकर्ताओं का कर्म समाज का पाथेय
सेवा भारती मध्यभारत के वेबसाईट के लोकार्पण कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित गोरेलाल ने बताया कि सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने विकट परिस्थितियों में भी पूरे समाज को अपना मानकर कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया है। सेवा भारती के कार्यकर्ताओं का कर्म समाज का पाथेय है। इस अवसर पर सेवा भारती भोपाल महानगर के पूर्णकालिक कर्ण सिंह कौशिक ने पीपीटी के माध्यम से कोरोना काल में सेवा भारती के द्वारा किए गए सेवा कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने डाटा के माध्यम से बताया कि कोरोना काल के संकट में सेवा भारती के लगभग 15072 कार्यकर्ताओं ने अथक परिश्रम करके 2244 स्थानों तक राहत सामग्री पहुंचाया। जब पूरी मानवता संकट में थी तब भी सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने स्वयं की परवाह किए बिना सडक़ो पर उतरकर 11,51,926 भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए । यह सेवा कार्य इतने बड़े स्तर पर किया गया कि इससे 12,58,425 परिवार लाभान्वित हुए।

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