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अस्पताल से नहीं मिली एंबुलेंस, मां का शव ठेले पर लेकर गांव पहुंचा बेटा

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मध्य प्रदेश के दामोह की एक तस्वीर शिवराज सरकार के उन दावों की पोल खोलती है, जिसमें सबकुछ ठीक बताया जा रहा है. एंबुलेंस के अभाव में अपनी मां की लाश को एक बेटा सरकारी अस्पताल से दो किलोमीटर दूर अपने गांव तक ठेले पर ले गया. 

ठेले पर महिला की लाश और उसे ले जाता बेटा… मध्य प्रदेश के दामोह की यह तस्वीर शिवराज सरकार के उन दावों की पोल खोलती है,  जिसमें सबकुछ ठीक बताया जा रहा है. एंबुलेंस के अभाव में अपनी मां की लाश को एक बेटा सरकारी अस्पताल से दो किलोमीटर दूर अपने गांव तक ठेले पर ले गया. 

दरअसल, 45 वर्षीय कलावती विश्वकर्मा की सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार शाम को मौत हो गई थी. इसके बाद उनकी लाश को पैतृक गांव पथरिया ले जाना था. महिला का लड़का दो दिन तक एंबुलेंस या किसी गाड़ी की व्यवस्था में लगा रहा, लेकिन अंत में गुरुवार सुबह वह ठेले पर अपनी मां की लाश को लेकर गांव जाने लगा. 

ठेले पर मां की लाश को ले जाते हुए इस लड़के का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. लड़के का नाम देबू विश्वकर्मा है. उसका कहना है कि मैंने प्राइवेट एंबुलेंस से जब मां की लाश को गांव पहुंचाने के बारे में पूछा तो उसने दो किलोमीटर के लिए 5 हजार रुपये मांगे, मेरे पास पैसे नहीं थे, फिर मैंने ठेले का इंतजाम किया और लाश को गांव लाया. 

देबू विश्वकर्मा का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र पर उसकी मां का सही तरीके से इलाज नहीं किया गया. हालांकि सरकारी अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया है. जिला चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. संगीता त्रिवेदी ने कहा कि महिला गंभीर हालत में अस्पताल आई थी, हमने लाख कोशिश की, ऑक्सीजन सपोर्ट दिया, लेकिन वह बचाई न जा सकी.

डॉ. संगीता त्रिवेदी ने कहा कि बिना हमारी जानकारी परिवार लाश को ले गई है. हालांकि, महिला के लड़के देबू विश्वकर्मा का आरोप है कि उसकी महिला को सही तरीके से इलाज नहीं मिल पाया है.

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