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4 महीने में भोपाल में 6 करोड़ से ज्यादा की ठगी

  • मध्य प्रदेश में सायबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी
  • ठगों का मुख्य टारगेट बने युवा
  • आकर्षक योजनाओं और जल्द पैसे कमाने के लालच में हो रहे जालसाजी का शिकार
  • पिछले 4 से 5 महीनों में राजधानी भोपाल के लोगों से 6 करोड़ से ज्यादा की ठगी
    भोपाल.
    टेक्नोलॉजी में आ रहे बदलाव के साथ अपराधों को अंजाम देने का तरीका भी बदला है. बीते 4 से 5 महीनों का अगर सायबर ठगी का रिकॉर्ड उठा के देखा जाए तो सिर्फ भोपाल वासियों से ही 6 करोड़ से ज्यादा का ऑनलाइन चुना लग चुका है. अब साइबर ठग बड़ी संख्या में युवाओं को अपना निशाना बना रहे हैं. इसके पीछे का बड़ा कारण निकलकर यह सामने आया है कि युवा आकर्षक योजनाओं और जल्द पैसे कमाने के लालच में जालसाजी का शिकार बन रहे हैं. जनवरी से अप्रैल के बीच दर्ज हुए सायबर अपराधों की रिपोर्ट के एनालिसिस में सामने आया कि ज्यादातर ठगी का शिकार ग्रेजुएट और 18 से 25 वर्ष के युवा हुए हैं. बड़ी हैरानी की बात यह है कि टेक्‍नोलॉजी फ्रेंडली होने के बावजूद युवा जागरुकता के अभाव में बड़ी संख्या में जालसाजी का शिकार बन रहे हैं और इस तरीके के अपराध करने वाले भी अधिकतर युवा ही हैं जो टेक्नोलॉजी को बेहतर रूप से समझते हैं.
    पैसे देने से पहले करें पूरी जांच
    भोपाल के डीसीपी साइबर क्राइम श्रुत्कीर्ति सोमवंशी ने बताया कि युवा शॉर्ट टर्म लोन, जल्द पैसे बनाने की स्कीम्स जैसे झांसों में आ रहे हैं. इसके चलते फ्रॉड होने की आशंका ज्‍यादा रहती है. युवा जल्दी पैसे कमाने के चक्कर में जालसाजी का शिकार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अगर पैसा दे रहे हैं तो उसकी पूरी जांच पड़ताल करें. आकर्षक योजना वाले ऑफर अधिकतर फ्रॉड निकलते हैं. सोशल मीडिया और कैम्प्स के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम साइबर पुलिस कर रही है. ऐसे मामलों के निराकरण में हमारी सफलता का प्रतिशत भी काफी बेहतर है. इसमें बड़ी चुनौती होती है कि आरोपी की ज्योग्राफिकल लोकेशन कुछ और होती है और क्राइम को अंजाम देने की जगह अलग होती है.
    पुलिस हेल्पलाइन की लें मदद
    साइबर क्राइम्स की रोकथाम की दिशा में पुलिस लगातार काम कर रही है. भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने कहा कि साइबर क्राइम के खिलाफ जागरूकता जरूरी है. फेक कॉल्स से सावधान रहें अगर कोई घटना किसी के साथ हो जाती है, साइबर क्राइम का कोई शिकार होता है तो पुलिस के हेल्पलाइन से सहायता ले सकता है. अगर हम लोग जागरुक रहेंगे तो ऐसे अपराधों से बच सकते हैं. ऐसे मामलों में इंटरनेट पर प्रलोभन दिया जाता है. कॉल भी आते हैं 24 घंटे से पहले अगर रिपोर्ट हो जाती है तो एक विंडो पीरियड होता है. उसमें पैसे वापस आने की संभावना होती है. पैसे अगर फ्रीज हो जाते हैं तो उन्हें वापस लाना आसान होता है.

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