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डॉक्टरों के हड़ताल को हाईकोर्ट ने बताया अवैध, ग्वालियर में एक मरीज की मौत

मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई है। क्योंकि प्रदेश के करीब 15 हजार सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर है। ग्वालियर में समय पर इलाज नहीं मिलने पर एक मरीज की मौत हो गई। इधर सरकार वैकल्पिक व्यवस्था में लगी है। साथ ही हड़ताली डॉक्टरों को मनाने की भी कोशिश कर रही है। इधर हाईकोर्ट ने हड़ताल पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध बताते हुए तत्काल काम पर लौटने का आदेश दिया है।

ग्वालियर में इलाज नहीं मिलने पर मरीज ने तोड़ा दम

ग्वालियर में डॉक्टरों की हड़ताल के पहले ही दिन इलाज नहीं मिलने पर एक मरीज ने दम तोड़ दिया है। 62 साल के अमर सिंह जाटव निवासी किलागेट को सांस की बीमारी थी। वह एक महीने से जयारोग्य हॉस्पिटल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती थे। बुधवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, परिजन डॉक्टरों के पास पहुंचे, लेकिन किसी डॉक्टर ने आकर जांच तक नहीं की। कुछ देर बाद अमर सिंह ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।

हाईकोर्ट ने हड़ताल को बताया अवैध

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में जारी डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध ठहराया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि हड़ताल पर बैठे सभी डॉक्टर तत्काल काम पर लौटे। डॉक्टर अस्पताल में मौजूद अंतिम मरीज का भी इलाज करें। हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि आगे से बिना अनुमति हड़ताल नहीं करें। भविष्य में टोकन स्ट्राइक को भी हाईकोर्ट ने अवैध बताया। याचिका जबलपुर के पूर्व पार्षद इंद्रजीत कुंवर पाल सिंह ने लगाई थी। जिस पर चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई।

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