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कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते इंदौर में ‘गेर’ पर रोक, आयोजकों ने जताई नाराजगी

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इंदौर। मध्यप्रदेश में पारंपरिक शोभायात्रा ‘गेर’ के लिए इस बार भी लोगों को इंतजार करना पड़ सकता है। मध्यप्रदेश का इंदौर जिला कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित है। इसी के चलते प्रशासन ने इस बार रंगपंचमी की पारंपरिक शोभायात्रा ‘गेर’ निकालने पर रोक लगाने का फैसला किया है। 
हालांकि गेर यात्रा निकालने वाले लोगों का कहना है कि प्रशासन को अपने फैसले पर एक बार और विचार करना चाहिए। आयोजकों का कहना है कि अभी होली में एक महीने से ज्यादा का समय हैं, ऐसे में कोरोना की स्थिति काबू में भी आ सकती है। इसलिए प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर ‘गेर’ पर रोक का फैसला
महामारी के मामलों में उछाल को देखते हुए प्रशासन ने रंगपंचमी की पारंपरिक शोभायात्रा “गेर” के आयोजन पर रोक लगाने का फैसला किया है। होली की दशकों पुरानी त्योहारी परंपरा से जुड़ी इस विशाल शोभायात्रा में हर साल हजारों हुरियारे जुटते हैं।
आपदा प्रबंधन समिति की मंगलवार शाम आयोजित बैठक के बाद जिलाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में खासकर इंदौर शहर में भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रमों के चलते कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में इजाफा हुआ है। इसके मद्देनजर हमने तय किया है कि इस बार गेर के आयोजन को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि गेर के आयोजकों से कहा गया है कि वे रंगपंचमी पर इस शोभायात्रा की तैयारी न करें। जिलाधिकारी ने बताया कि शहर में बडे़ धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को भी फिलहाल अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि स्थानीय अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के लिए बिस्तरों की तादाद बढ़ाई जा रही है।
सिंह ने बताया कि शहर के होटलों और मैरिज गार्डनों में होने वाले आयोजनों में हॉल या खुले मैदान की कुल क्षमता के केवल 50 फीसदी मेहमानों को बुलाने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जगहों पर मास्क नहीं पहनने वाले लोगों से सख्ती के साथ जुर्माना वसूला जाएगा।
टोरी कॉर्नर रंगपंचमी के महोत्सव के आयोजक शेखर गिरि का कहना है कि वो पिछले 74 साल से गेर निकाल रहे हैं, इस साल ये उनका 75वां साल होता। उन्होंने आगे कहा कि अगर पिछले साल गेर निकलती तो विश्व धरोहर में शामिल हो जाती। आयोजकों का मानना है कि गेर निकालना शहर के लिए गर्व का विषय होता है। 
उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने गेर ना निकालने का फैसला किया है तो हम उनके इस फैसले का पालन करेंगे लेकिन लोगों के इकट्ठा ना होने पर प्रशासन ने कैसी तैयारी की है, यह देखना होगा। 
इधर संगम कॉर्नर और संस्था सृजन पिछले 67 सालों से गेर का आयोजन कर रहे हैं। आयोजन कमलेश खंडेलवाल के मुताबिक, कलेक्टर से निवेदन है कि गेर निकलने में अभी एक महीने से ज्यादा का समय है। प्रशासन का यह फैसला लेना जल्दबाजी होगा। 
उन्होंने कहा कि इस फैसले पर प्रशासन को पुनर्विचार करना चाहिए। इसमें देशभर के लोग शामिल होते हैं। इसके अलावा हिंदरक्षक और राधा-कृष्ण फाग यात्रा के तहत पिछले 22 साल से गेर निकाली जा रही है। इसके आयोजक एकलव्य गौड़ का कहना है कि इस साल गेर का आयोजन ना करना जनहित में लिया गया फैसला है। ऐसा इसलिए क्योंकि महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से कुछ जिलों में दोबारा से लॉकडाउन लगा दिया गया है।

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