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स्वास्थ्य, राजस्व, निकाय और पुलिस के लिए तो हां, लेकिन बाकी के लिए क्या?

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कोरोना से मौतों के मामले में सरकार से आर्थिक सहायता को लेकर स्पष्ट नीति नहीं होने से प्रदेश में भ्रम की स्थिति है। कोविड को अब तक प्राकृतिक आपदा नहीं माना है, इसलिए आम आदमी की मौत पर सरकारी इमदाद को लेकर आदेश जारी नहीं हुआ है। सरकारी कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना में शामिल करने की घोषणा हो चुकी है, लेकिन इसमें स्पष्टता नहीं है।

स्वास्थ्य, राजस्व, पुलिस और नगरीय निकायों के कर्मचारियों को तो फ्रंटलाइन वर्कर मान लिया गया है, अन्य विभागों को इस योजना का लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ है। भास्कर की पड़ताल बताती है कि आम आदमी की कोरोना से मौत होने पर भी उसके परिजन को अन्य योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता मिल सकती है।

सरकारी विभाग के अलग-अलग प्रावधान

  • गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने घोषणा की है कि प्रदेश में कोविड-19 से पुलिसकर्मी की मौत होने पर उसके परिजन को राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रुपए और केंद्रीय कल्याण निधि से 1 लाख रुपए दिए जाएंगे। साथ ही मृतक के एक परिजन को अनुकंपा नियुक्ति भी दी जाएगी।
  • कृषि मंत्री कमल पटेल ने घोषणा की है कि यदि किसी मंडी कर्मचारी की कोरोना से मौत होती है तो परिजन को 25 लाख की सहायता निधि दी जाएगी। यहां विरोधाभास यह है कि मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना में परिजन को 50 लाख की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।
  • ऊर्जा विभाग के ओएसडी एसके शर्मा ने 8 मई को जारी आदेश विभाग के साथ ही बिजली कंपनियों के स्थाई के साथ ही दैवेभो और आउट सोर्स कर्मचारियों को भी मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना का पात्र बता दिया गया है। इस आदेश को लेकर भी अधिकारी भ्रम में हैं।
  • शिक्षकों के बारे में अभी शिक्षा विभाग से अलग आदेश निकलना बाकी है। प्रदेश में स्वास्थ्य, नगरीय निकाय, वन विभाग के साथ ही शिक्षा विभाग के कई कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है।

जानिए; आम आदमी को कैसे मिल सकती है मदद

राज्य सरकार ने किन्हें कोरोना योद्धा माना है, जिनकी मौत पर उनके परिजन को वह आर्थिक सहायता देती है?
मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के बारे में जारी सर्कुलर में शासकीय कर्मचारियों के अतिरिक्त राज्य सरकार के विभागों के कर्मचारी, बोर्ड, निगम, प्राधिकरण, एजेंसी, कंपनियां, निकाय आदि के द्वारा नियुक्त स्थायी, अनुबंधित, दैवेभो, तदर्थ, आउटसोर्स कर्मियों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता को पात्र माना गया है।
यदि व्यापारी, मजदूर या निराश्रित की मौत कोविड से होती है तो परिजन को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा?
नहीं, ऐसा नहीं है। यदि कोई मजदूर कर्मकार कल्याण में पंजीकृत है या संबल कार्डधारी है तो उसे 2 से 4 लाख तक की मदद मिल सकती है। संबल कार्ड, राशन पात्रता पर्ची या कर्मकार पंजीयन नंबर धारक, मनरेगा मजदूर भी आर्थिक सहायता ले सकते हैं।
इसके लिए परिजन कहां संपर्क करें?
ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद व जिला पंचायत तथा नगरीय क्षेत्रों में नगर पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम में आवेदन देना होगा।
यदि किसी के पास मजदूरी या संबल कार्ड नहीं है तो उसे मदद नहीं मिलेगी?
ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री सहायता कोष में आवेदन करना चाहिए। इसके लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को पहल करना चाहिए।
प्रधानमंत्री जनधन योजना में खाते खुलवाए गए थे। कहा गया था कि खाता खुलवाने वाले का बीमा भी होगा। क्या ऐसे खाताधारकों की कोविड से मौत होने पर परिजन को बीमा का लाभ मिलेगा?
ये खाते बैंकों में खोले गए थे। इसमें किसी भी सरकारी विभाग की जिम्मेदारी नहीं थी। सरकार को न बीमा राशि का पता है और न क्लेम को लेकर कोई क्लेरिटी है। बैंकों में भी ऐसे क्लेम का प्रावधान फिलहाल नहीं है। इस बारे में केंद्र ही बैंकों को निर्देश दे सकती है।

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