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विश्व स्वास्थ्य दिवस विशेष: कोरोना के संकट काल में सशक्त हुईं स्वास्थ्य सेवाएं, गांवों से लेकर बड़े शहरों के अस्पतालों में बढ़े बिस्तर और वेंटिलेटर

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भोपाल। आज विश्व स्वाथ्स्य दिवस है। दुनियां भर के साथ ही कोरोना वायरस के कहर ने पूरे मध्यप्रदेश में हाहाकार मचा रखा है। कोरोना ने बीते साल प्रदेश में दस्तक दी थी। उस वक्त अकेले मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि दुनियां भर के कई देश इस वायरस की भयावहता से अनजान थे। भारत सरकार द्वारा डब्ल्यूएचओ से मिले निर्देशों और गाइडलाइन के आधार पर मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफसरों के संग इस संकट से निपटने की रणनीति तैयार की। जिस प्रदेश में कोरोना के सेंपल की जांच के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी उसकी शुरूआत एम्स भोपाल और स्टेट वायरोलॉजी लैब से की गई। इसके बाद सभी मेडिकल कॉलेजों की लैब में जांच शुरू की गई। इसके बाद जिलों में जांच की सुविधा मुहैया कराने टीबी की जांच करने वाली सीबी नाट और टू्रनॉट मशीनों से जांच शुरू की गई। आज की स्थिति में प्रदेश भर में 33980 सेंपल रोजाना जांचने की क्षमता है। आज की स्थिति में प्रदेश भर में 32 प्रयोगशालाओं में आरटी-पीसीआर जांच की जा रही है।

तीन महीनों में तैयार हो गए हर जिले में कोविड आईसीयू

बीते साल मार्च में कोरोना के मरीज मिलने शुरू हो गए थे। उस वक्त प्रदेश के किसी भी जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए कोविड आईसीयू नहीं थे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू बनाने का काम शुरू किया और चार महीनों में सभी जिला अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए लिए 595 बिस्तर ऑक्सीजन सप्लाई, मल्टी पैरामॉनीटर और वेंटिलेटर सुविधा सहित तैयार कर दिए। अब जिलों से कोरोना मरीजों को बडेÞ शहरों में रेफर करने से राहत मिली हैं।

जिला अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए ऐसे बढ़ी सुविधाएं

सुविधा 2020 2021
आईसीयू बेड 00 595
वेंटिलेटर 44 204
ऑक्सीजन सिलेंडर 5 हजार 18 हजार
कोविड़ आईसीयू 00 50
एचएफएनसी 00 80
पोर्टेबल एक्सरेमशीन 00 50

रात भर जागकर एमडी ने पढ़ी विभाग की किताबें ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारा जा सके


प्रदेश में कोरोना संकट की आहट मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के अफसर व्यवस्थाएं दुरूस्त करने तैयारियों में जुट गए। एनएचएम की मिशन संचालक छवि भारद्वाज की जब एनएचएम में पदस्थापना हुई तो उन्हें सरकारी आवास आवंटित नहीं हुआ था। भारद्वाज के साथ काम करने वाले कर्मचारी बताते हैं कि उन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने के लिए विश्राम गृह के कक्ष में रहकर स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम की रिपोर्ट्स और किताबें पढ़ी। भारद्वाज का मानना था कि वे डॉक्टर नहीं है लेकिन सिस्टम को सुधारने के लिए जमीनी स्तर का तकनीकी अनुभव जरूरी है। उन्होंने प्रदेश की सबसे बड़ी चिंता शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए सुमन कंट्रोल रूम की व्यवस्था शुरू कराई इस कंट्रोल रूम में हर एक गर्भवती का पंजीयन कर उनमें से हाई रिस्क गर्भवतियों को प्रसव पूर्व जोखिमों से उबारने के लिए रक्त चढावाने, आयरन शुक्रोज के डोज देने और प्रसव के लिए उसकी सेहत के हिसाब से मैपिंग कराने की व्यवस्था की। यही नहीं कोरोना संकट काल में प्रदेश भर के अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों के लिए अस्थाई स्टाफ की भी व्यवस्था की। इसी दरम्यान टेलीमेडिसिन के जरिए साढ़े पांच सौ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को विशेषज्ञों की सलाह के लिए हब एंड स्पोक मॉडल से जोडा। विभागीय कर्मचारी मानते हैं कि डॉक्टर न होते हुए भी वे मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य की अच्छी सुविधाएं देने के लिए जमीनी योजनाएं बना रहीं हैं।

संस्थागत प्रसव का संदेश देने आईएएस पल्लवी ने मंडला के छोटे अस्पताल में दिया था बेटे को जन्म

  • साल 1999 में मंडला जिले की सीईओ जिला पंचायत रहते हुए की थी अनुकरणीय पहल

वर्ष 1999 में मंडला जिले के तत्कालीन कलेक्टर मनोज गोविल के साथ उनकी पत्नी डॉ. पल्लवी जैन गोविल उसी जिले में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी थीं। उसी दरम्यान इसी आईएएस दम्पत्ति के परिवार में पहली संतान का जन्म होना था। मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले मनोज और पल्लवी के परिवार जनों ने उन्हें दिल्ली आकर प्रसव कराने के लिए सलाह दी। लेकिन बतौर सीईओ जिला पंचायत रहते हुए डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने मंडला जिले में संस्थागत प्रसव के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव देखा। उन्होंने मंडला में ही प्रसव कराने का निर्णय लिया। परिवारजनों ने पहला बच्चा होने के चलते ऐसा जोखिम लेने के लिए मना किया। लेकिन डॉ. पल्लवी ने संस्थागत प्रसव का संदेश देने के लिए मंडला के एक छोटे से अस्पताल में अपने पहले बेटे को जन्म दिया। वे कहतीं हैं उस समय थोडा डर लगा था लेकिन फिर लगा कि यहां की महिलाओं के भी जिस अस्पताल में होते हैं में भी वहीं अपने बच्चे को जन्म दूंगी। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। यही वजह है कि संस्थागत प्रसव के मामले में मप्र अच्छे स्थान पर ह

डॉक्टर, स्टाफनर्स, वार्ड वॉय पैरामेडिकल स्टाफ की हुईं व्यवस्थाएं

कोरोना महामारी के डरावने माहौल में समय से संक्रमितों की पहचान और उनका समुचित उपचार सबसे बड़ी चुनौती थी। दूसरे राज्यों की तरह मप्र में भी स्वास्थ्य महकमे में डॉक्टर्स से लेकर अस्पतालों में काम करने वाले सपोर्टिंग, हाउसकीपिंग स्टाफ की भारी कमी थी। बीते साल की शुरूआत में संदिग्ध मरीजों के सेंपल लेने से लेकर जांचने व उपचार के लिए डॉक्टरों और टेक्नीशियन की कमी हो रही थी। आनन-फानन में राष्ट:ीय स्वास्थ्य मिशन मप्र ने पूरे प्रदेश में अस्थाई कोविड कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए आदेश जारी किए। यही नहीं संदिग्ध मरीजों की सेंपलिंग, संक्रमित क्षेत्रों में सर्वे और कॉन्टेक्ट टे्रसिंग के लिए वॉलेंटियर के तौर पर डेंटल, नर्सिंग, पैरामेडिकल, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा छात्रों को भी जोड़ा। यही वजह है कि कोरोना का संक्रमण भयावह रूप नहीं ले सका।

एनएचएम ने इतने अस्थाई कर्मचारी कोरोना संकट में कराए मुहैया

अस्थाई कर्मचारी्र संख्या
चिकित्सक 166
स्टाफनर्स 2333
आयुष डॉक्टर 877
लैब टेक्नीशियन 555
फार्मासिस्ट 390
एएनएम 457
वार्ड बॉय 244
सपोर्ट स्टाफ 449
डाटा एंट्री ऑपरेटर 156

सर्विस आईडी अपलोड कराकर स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के फिर होंगे पंजीयन

  • केन्द्र सरकार ने टीकाकरण के डेटाबेस में 24 फीसदी बढ़ोत्तरी के बाद बंद कर दी थी सुविधा
  • 45 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को नहीं लगेगा टीका
    केन्द्र सरकार के कोविन पोर्टल डेटाबेस में अचानक से स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में 24 फीसदी की बढ़ोत्तरी के बाद शनिवार से स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइनर्स के पंजीयन बंद कर दिए गए थे। इसके बाद सिर्फ 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही टीके लगाए गए। लेकिन अब केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बार फिर आदेश में संशोधन किया है। अब हेल्थकेयर वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स की एम्प्लाई आईडी पंजीयन के समय पोर्टल पर अपलोड़ करके टीका लगाया जा सकेगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है।
  • केवल सरकारी केन्द्रों पर ही होगा पंजीयन
    केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण द्वारा सभी राज्यों को भेजे आदेश में स्वास्थ्यकर्मियों व फ्रंटलाइनर्स की फोटो युक्त एम्प्लाई आईडी (सरकारी सेवा में होने का परिचय पत्र) अपलोड कर रजिस्टे्रशन करने के लिए कहा है। लेकिन इन दोनों कैटेगरी के कर्मचारियों को सिर्फ सरकारी सेंटर्स पर ही पंजीयन की सुविधा मिलेगी।
    स्वास्थ्य कर्मी की श्रेणी में इन नौ विभागों के कर्मचारी शामिल
    1- फ्रंटलाइन हेल्थ एंड आईसीडीएस: आशा कार्यकर्ता, एमपीडब्ल्यू, एएनएम, आशा फैसिलिटेटर, आंगनवाडी कार्यकर्ता व सहायिका। 2- नर्सेस एंड सुपरवायजर्स: स्टाफ नर्स, पीएचएन, एलएचवी, सीएचओ, हेल्थ एंड आईसीडीएस सुपरवायजर, सीडीपीओ, सीएमएचओ, जिला परियोजना अधिकारी आईसीडीएस,जिला टीकाकरण अधिकारी। 3 मेडिकल ऑफीसर्स: ऐलोपैथिक डॉक्टर्स, आयुष डॉक्टर्स, डेंटिस्ट, स्वास्थ्य विभागों के सेवाप्रदाता व संस्थागत अधिकारी। 4- पैरामेडिकल स्टाफ: लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, रेडियोग्राफर, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड वॉय, अन्य पैरामेडिकल स्टाफ। 5- सपोर्ट स्टाफ: ड्राइवर्स एंड सिक्योरिटी स्टाफ, सेनेटाइजेशन वर्कर्स, अन्य सपोर्ट स्टाफ। 6- स्टूडेंट्स: मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, अन्य पैरामेडिकल, 7- साइंटिस्ट एंड रिसर्च स्टाफ, 8-क्लेरिकल एडमिनिस्टे्रशन स्टाफ 9- अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी
    इन विभागों के कर्मचारी फ्रंटलाइनर्स में शामिल
    1- मिलिट्री एंड डिफेंस: आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, कोस्ट गाड्र्स। 2- गृह मंत्रालय: असम रायफल्स, बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी, एसएसबी, होमगार्ड, आपदा प्रबंधन बल वॉलेंटियर्स, जेल स्टाफ। 3- नगरीय निकाय कर्मचारी। 4- राज्य सरकार के कर्मचारी: कोविड कंटेनमेंट, सर्विलेंस सहित अन्य कोविड ड्यूटी में संलग्न राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, राज्य पुलिस। 5- जिला प्रशासन के ऐसे कर्मचारी जो केन्द्र सरकार द्वारा शामिल नहीं किए गए।

वैक्सीनेशन अपडेट मप्र भोपाल
कुल टीकाकरण 4492165 338090
45 से 60 वर्ष के कोमॉर्बिड 1035257 116795
60 वर्ष से अधिक आयु के 2128387 106999
पहला डोज लगवाले वाले हेल्थकेयर+ फ्रंटलाइनर्स 809324 75272
सेकेण्ड डोज लगवाले वाले हेल्थकेयर+ फ्रंटलाइनर्स 519197 39024

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