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स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर के तौर हुआ अपात्र लोगों का टीकाकरण, केन्द्र ने लगाई रोक

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  • केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों को पत्र भेजकर पंजीयन किए बंद

भोपाल। कोरोना के टीकाकरण का नेताओं ने राजनीतिकरण कर दिया। भोपाल में नेताओं के दबाव में कई ऐसे हितग्राहियों को टीके लगा दिए गए। जिनकी आयु 45 वर्ष से कम है। सूत्रों के मुताबिक कई लोगों ने खुद को हेल्थकेयर वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कर के तौर पर रजिस्टर्ड कराकर कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लगवा लिया। ऐसा अकेले भोपाल में ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में सामने आया। केन्द्र सरकार के कोविन डेटाबेस में हेल्थकेयर वर्कर्स के आंकडों में 24 फीसदी की बढ़ोतरी बीते कुछ दिनों में देखी गई इसके बाद शनिवार को ही केन्द्र सरकार ने कोविन पोर्टल से हेल्थ केयर वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स के रजिस्टे्रशन की प्रक्रिया बंद कर दी। अब इन दोनों कैटेगरी के जिन कर्मचारियों को पहला टीका लगा था उन्हें सिर्फ दूसरा डोज लग सकेगा।

16 जनवरी से शुरू हुआ था राष्ट्रव्यापी टीकाकरण

देशव्यापी टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू हुआ था जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया और दो फरवरी से अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। साठ वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कोविड-19 टीकाकरण का अगला चरण एक मार्च से शुरू हुआ था।

भूषण ने पत्र में कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के टीकाकरण के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर सभी प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘विभिन्न स्रोतों से ऐसी कई सूचनाएं मिली है कि कुछ कोविड-19 टीकाकरण केन्द्रों में कुछ अपात्र लाभार्थी स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के रूप में पंजीकरण करा रहे हैं और निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए टीकाकरण किया जा रहा है।Ó उन्होंने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्तियों के कर्मचारियों के किसी भी नए पंजीकरण की अनुमति नहीं दी जाये।

इधर नर्सिंग स्टूडेंट्स और मतदान दलों को टीके लगाने के आदेश

शनिवार को राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला ने आदेश जारी करते हुए मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों में कोविड ड्यूटी व अन्य मरीजों के इलाज में सेवाएं देने वाले नर्सिंग स्टूडेंट्स व इंटर्न को टीके लगाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही दमोह में प्रस्तावित विधानसभा उपचुनाव के मतदान दलों के कर्मचारियों को भी टीके लगाने के आदेश दिए हैं। केन्द्र सरकार के आदेश के बाद अब इन कर्मचारियों को टीके लगाने पर संशय बढ़ गया है।

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