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शिक्षा में भारतीय मूल्यों को समाहित करने के लिए शिक्षण में भारतीयता लाना होगी

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  • भोज विवि में राष्टीय शिक्षा नीति और व्यक्तित्व विकास पर वेबिनार

भोपाल । व्यक्ति का मूल्य तभी होगा, जब व्यक्ति मूल्य परक जीवन जीएं। शिक्षा में भारतीय मूल्यों को समाहित करने के लिए शिक्षण में भारतीयता लाना होगी। शिक्षा तन, मन, बुद्धि और आत्मा को संतुष्ट करें तभी शिक्षा पूर्ण मानी जा सकती है। भोज मुक्त विश्वविद्यालय भोपाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 और व्यक्तित्व विकास विषय पर आयोजित वेबीनार को संबोधित करते हुए भारतीय शिक्षण मंडल के महासचिव डॉ. उमाशंकर पचौरी ने कही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. जयंत सोनवलकर ने की। कुलपति प्रो. सोनवलकर ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय मूल्यों को शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए और अवगत करवाया कि विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम में आधारभूत पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल किया जाएगा। साथ ही अवगत करवाया गया की विश्वविद्यालय द्वारा सर्टिफ़िकेट पाठ्यक्रम चलाए जा रहे है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एलएस सोलंकी ने अपने धन्यवाद भाषण में समस्त ऑनलाइन उपस्थित सहभागियों को धन्यवाद दिया और कहा कि करोना काल में समस्त अकादमिक गतिविधियां निरंतर चल रही है और साथ में इस तरह के विचार विमर्श भी ऑनलाइन माध्यम से निरंतर हो रहे हैं।

उन्होंने अपने संबोधन में मुकुल कनिटकर जी की पुस्तक में लिखे नौ शाश्वत सिद्वांतो का उल्लेख करते हुए कहा कि एकात्म दृष्टि, विविधता का सम्मान, पूर्णता, ईश्वर निष्ठा, अभ्योदय, सामूहिक चरित्र, पारिवारिक मूल्य, दायित्व बोध, और वैज्ञानिक दृष्टि को शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए। इसी से शिक्षा में भारतीय मूल्यों को समाहित किया जा सकता है। वर्तमान में लागू नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इसको समाहित किया गया है।

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