Home भोपाल अस्पताल के आईटी मैनेजर से इंजेक्शन खरीदकर बेचने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार

अस्पताल के आईटी मैनेजर से इंजेक्शन खरीदकर बेचने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार

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रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में फिर से कोलार के जेके अस्पताल का नाम सामने आया है। यहां का आईटी मैनेजर आकाश दुबे इंजेक्शन बेचता था। पुलिस ने उसके तीन दोस्तों अंकित सलूजा, दिलप्रीत, आकर्ष सक्सेना को गिरफ्तार किया है। जबकि आकाश फरार है। वह अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों के लिए आए इंजेक्शन चुरा लेता था, बाद में उन्हें तीनों दोस्तों को बेच देता था। एसपी साउथ साईं कृष्णा ने बताया कि तीनों आरोपियों को मंदाकिनी चौराहे से एक वरना कार से गिरफ्तार किया गया है। तीनों ग्राहक के इंतजार में खड़े थे।

कार की तलाशी में पांच इंजेक्शन मिले। इन्होंने अब तक 16 इंजेक्शन लेकर बेचने की बात कबूली है। बताया जाता है कि आकर्ष को भोपाल क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मियों ने पांच दिन पहले पकड़ा था। आरोप है कि ढाई लाख रुपए लेकर उस वक्त उसे छोड़ दिया गया था। इंजेक्शन की डीलिंग के लिए आरोपी कोड वर्ड ‘एंड्रॉयड’ का इस्तेमाल करते थे। बता दें कि 23 अप्रैल को जेके अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ में काम करने वाले झलकन सिंह मीणा को गिरफ्तार किया था। वह एक नर्स की मदद से इंजेक्शन चुराता था।

कालाबाजारी की चेन; आकर्ष के 6 नंबर स्थित मेडिकल स्टोर से आती थी डिमांड, वह अंकित और दिलप्रीत के साथ मिलकर आकाश से खरीदता था इंजेक्शन

टीआई ने बताया कि आरोपियों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए अपना एक कोड वर्ड बनाया था। इसे वे ‘एंड्रॉयड’ कहकर बुलाते थे। बातचीत में यदि कोई रेमडेसिविर की डिमांड करता तो उसे आरोपी भाव नहीं देते थे। एंड्रॉयड की मांग होने पर आरोपी समझ जाते थे कि ये अपना आदमी है। आकर्ष का छह नंबर पर मेडिकल स्टोर है। इंजेक्शन की डिमांड उसी के पास आती थी, फिर वह अपने दोस्तों अंकित और दिलप्रीत के साथ आकाश से इंजेक्शन लेकर सप्लाई करते थे। अंकित इंदौर सीटकवर संचालक है। जबकि दिलप्रीत उसका भाई है जो कार एसेसरीज का काम करता है।

आकाश फरार, गिरफ्तारी के बाद खुलेंगे कई राज : मरीजों को लगाने के लिए जो इंजेक्शन अस्पताल से स्टाफ को मिलते थे, उन्हें आकाश कुछ कर्मचारियों की मदद से उठवा लेता था। बाद में इंजेक्शन की खाली शीशी मरीज के पास रखकर सामान्य स्लाइन लगवा देता था। ऐसा अब तक कितने मरीजों के साथ किया जा चुका है, ये आकाश की गिरफ्तारी के बाद ही स्पष्ट होगा।

25 हजार में बेचा एक इंजेक्शन
पूछताछ में अंकित ने बताया कि 28 अप्रैल को उसने आकाश से एक इंजेक्शन 25000 रुपए में लेकर अपने रिश्तेदार को दिया था। 8 मई को पांच इंजेक्शन के लिए 60 हजार रुपए आकाश को गूगल पे से दिए थे। तीन दिन पहले उसने आकाश से फिर पांच इंजेक्शन लिए और 80 हजार रुपए का कैश पेमेंट किया।

कमीशन जोड़कर बेचते थे
टीआई चंद्रकांत पटेल ने बताया कि आकाश को किए गए पेमेंट में अपना कमीशन जोड़कर आरोपी ये इंजेक्शन नए ग्राहकों को बेचते थे। पुलिस ने तीनों को आईपीसी की धारा 269-270, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 53/57, महामारी अधिनियम 1897 की धारा 3 आदि में गिरफ्तार किया है।

नकली रेमडेसिविर की जांच एसटीएफ को सौंपने की तैयाारी
नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की बड़े पैमाने पर हुई सप्लाई की जांच एसटीएफ को देने की तैयारी है। कुछ दिन पहले सूरत के एक गिरोह को इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह गिरोह ग्लूकोज और नमक से नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन तैयार कर सप्लाई कर रहा था।

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