Home भोपाल कहानी उन बच्चों की जिन्होंने संक्रमण में माता-पिता दोनों को खाेया, रूही-माही...

कहानी उन बच्चों की जिन्होंने संक्रमण में माता-पिता दोनों को खाेया, रूही-माही अब नाना-नानी के साथ रहती हैं और यश दादी के घर

13
0

कोरोना का कहर कुछ परिवारों पर ऐसा बरपा कि हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। कुछ मासूम ऐसे भी हैं जिन के सिर से माता-पिता का साया सदा-सदा के लिए उठ गया। लेकिन इन मासूमों की निगाहें हर पल उन्हें तलाशती हैं। लेकिन, जिंदगी का ककहरा सिखाने वाले उनके माता-पिता अब कहां आने वाले हैं। ऐसी ही दास्तां बयां करती दो हकीकत-

दोनों बच्चियां दिनभर मां-पिता को तलाशती हैं

छह साल की रूही और सात साल की माही… इनके पिता की 29 अप्रैल को कोरोना से मौत हो गई। इनकी मां यानी हमारी बेटी भी 3 मई को यही संक्रमण निगल गया। अब इन दोनों मासूमों को मैं अपने घर ले आया। इनके पिता मोहन लाल बरखेड़ा पठानी स्थित विंध्य हर्बल में काम करते थे। मां अनीता गृहणी थी। माता-पिता की मौत के बाद अब इन बच्चियों की कैफियत को देखा नहीं जा सकता।

रूही और माही सुबह उठते ही इधर-उधर देखती हैं। मम्मी को आवाज लगाती हैं तो अपने पापा के बारे में बार-बार पूछती है। लेकिन बूढ़ी नानी के दुलार में मां-पिता को कुछ पल के लिए भूल जाती है। फिर खेल में मग्न होने के बाद यह जब थक जाती है तो दोनों की आंखें फिर मां और पिता को तलाशती हैं। रोती हैं। तरह-तरह के सवाल करती हैं, जिनका जवाब देना मुश्किल है। अभी तो हम दोनों को बहलाते हुए कहते हैं कि मम्मी-पापा अस्पताल में है। जल्दी आ जाएंगे। -जैसा कि रूही-माही के नाना सुभाष रायकवार ने बताया

ऑक्सीजन मास्क की वजह से पिता के आखिरी शब्द नहीं सुन सका

मेरी मां नीलू वर्मा को 20 अप्रैल को कोविड हुआ और 27 अप्रैल को हमें छोड़कर चली गई। उसी दिन जब हम दाह संस्कार करके लौटे तो पापा बोले- चलो, टेस्ट करवा लें। टेस्ट में मेरी रिपोर्ट निगेटिव और पापा की पॉजिटिव आई। फिर पापा विनोद वर्मा की तबीयत खराब होने पर उन्हें मुबारकपुर स्थित एक अस्पताल में एडमिट कराया, बाद में उन्हें चिरायु में भर्ती कराया। जहां 4 मई को वो भी नहीं रहे।

कुछ दिन पहले ही पिता ने मुझसे पूछा था कि बेटा बड़ा होकर क्या बनना है। मैंने उन्हें कहा कि कलेक्टर बनना है। उन्होंने पूछा क्यों । मैंने कहा- ताकि बड़ा होकर आप लोगों को आरामदायक जीवन दूं…। शायद यह भगवान को मंजूर नहीं था। पापा के जाने से दो दिन पहले वीडियो कॉल किया था, तब उनके मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगा होने से वो जो भी कह रहे थे, मैं उसे ठीक से सुन नहीं सका। अब मैं मेरे दादा-दादी के साथ रह रहा हूं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here