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स्वतंत्रता की लड़ाई के इतिहास में जनजातीय वर्ग का योगदान अहम

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  • स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश जनजातीय समुदाय का योगदान’ विषय पर वेबिनार में प्रो. डॉ. शरद खरे ने कहा

स्वदेश संवाददाता। भोपाल

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जनजातीय वीरों, आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों के देश की आजादी की लड़ाई में उनके वास्तिवक योगदान को मूल्यांकित और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इस वजह से आम लोग जनजातीय वर्ग के गौरव से आसानी से परिचित हो सकेंगे। यह बात वरिष्ठ इतिहासकार और जनजातीय मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ शरद खरे, प्राध्यापक जेएमसी महिला शासकीय महाविद्यालय मंडला ने पीआईबी और आरओबी भोपाल द्वारा जनजाति गौरव दिवस के सन्दर्भ में ‘स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश जनजातीय समुदाय का योगदान’ विषय पर बुधवार को आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता की लड़ाई के इतिहास में जनजातीय वर्ग का अहम योगदान है। श्री खरे ने रानी दुर्गावती, राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह सहित महाकौशल क्षेत्र के जनजातीय वीरों के योगदान को विस्तार से रेखांकित किया।

गैर जनजातीय नजरों से देखें योगदान : मारू

वेबिनार में सौरभ मारू, सहायक प्राध्यापक, एसपीटीएम एनएमआईएमएस यूनिवर्सिटी शिरपुर, धुले, महाराष्ट्र ने संथाल विद्रोह, भील विद्रोह, कोल विद्रोह सहित बहुत सारे जनजातीय विद्रोहों का जिक्र किया और जनजातीय समाज के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को रेखांकित किया।

श्री मारू ने भीमा नायक, भगवान बिरसा मुंडा और टांट्या भील के योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा जनजातीय समाज के योगदान का बहुत कम दस्तावेजीकरण हुआ है और उनके योगदान को अंग्रेजों और गैर जनजातीय समाज की नजरों से ही देखा गया था। पर वर्तमान समय में इस पर अच्छा काम हो रहा है।

जनजातीय समाज के योगदान को रखा ध्यान : पाठराबे

पीआईबी, भोपाल के अपर महानिदेशक श्री प्रशांत पाठराबे ने कहा कि सरकार ने जनजातीय समाज के योगदान को ध्यान में रखते हुए 15 नंवबर को हर साल जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। उन्होंने हबीबगंज स्टेशन का नामकरण रानी कमलापति रेलवे स्टेशन करने का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम में आरओबी भोपाल और उसके विभिन्न एफओबीज के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। वेबिनार का संचालन आरओबी भोपाल के सहायक निदेशक श्री शारिक नूर ने किया।

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