Home भोपाल शिवराज कैबिनेट का फैसला: प्रदेश की 6876 अवैध कॉलोनियां होंगी नियमित

शिवराज कैबिनेट का फैसला: प्रदेश की 6876 अवैध कॉलोनियां होंगी नियमित

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  • नक्शे से 20 प्रतिशत तक निर्माण फ ीस देकर हो सकेंगे वैध
  • 40 लाख से अधिक लोग होंगे लाभान्वित
  • आगे अवैध निर्माण पर ठेकेदार को 7 साल की सजा का प्रावधान

स्वदेश ब्यूरो, भोपाल

प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव से पहले राज्य की शिवराज सरकार ने बड़ा फैसला किया है। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में 6 हजार से ज्यादा अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्तावित अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई। कॉलोनियों के नियमितिकरण का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इन कॉलोनियों के रहवासी अब बैंक से लोन भी ले सकेंगे और विकास कार्य भी होंगे। नए नियम में नक्शे से 20 प्रतिशत तक अधिक क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों को भी तय शुल्क देकर वैध कराया जा सकेगा।

अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कवायद बीते 3 सालों से जारी थी। वर्ष 2018 में भी शिवराज सरकार ने यह निर्णय लिया था। इसके तहत तीन हजार से अधिक कॉलोनियां भी वैध हुई, लेकिन हाईकोर्ट के एक निर्णय के बाद इनकी वैधता समाप्त हो गई थी। पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने भी इस बारे में सोचा लेकिन वह समय पर निर्णय नहीं ले सकी। इसी माह राज्य विधानसभा के बजट सत्र में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने प्रदेश की चिन्हित अवैध कॉलोनियों को वैध करने की बात कही थी। सरकार पिछले बजट सत्र में यह अधिनियम पारित करने की तैयारी में थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण सत्र की अवधि कम होने से यह अधिनियम पेश नहीं हो सकता।

बहरहाल, इसी क्रम में बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में संपन्न वर्चुअल बैठक में इन कॉलोनियों को वैध करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी ऑफलाइन ही मौजूद थे, शेष मंत्रियों ने वर्चुअल ही इसमें भाग लिया।

श्री सारंग ने बताया कि अवैध कॉलोनियों को वैध करने का फैसला जल्द ही अध्यादेश के माध्यम से लागू होगा। चिन्हित कॉलोनियों की संख्या 6876 हैं जिन्हें वैध किया जाना है। श्री सारंग ने कहा कि कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया में ऐसे निर्माण जो स्वीकृत नक्शे की तुलना में अधिकतम 20 प्रतिशत क्षेत्र में किए गए, उन्हें तय समझौता शुल्क देकर वैध कराया जा सकेगा, इससे अधिक निर्माण को तोड़ा जाएगा।

अध्यादेश में तय होंगे नियम

सरकार अब विधयेक को अध्यादेश के माध्यम से लागू करेगी। इसके बाद नियम बनाए जाएंगे, जिसमें अवैध काॉलोनी की कट ऑफ डेट, नियमित योग्य कॉलोनी में अधोसंरचना विकास के लिए कॉलोनाइजर और रहवासियों से कितनी राशि ली जाएगी। नियमों में अवैध निर्माण पर सजा का प्रावधान होगा। श्री सारंग ने कहा कि बिना अनुमति निर्माण करने पर कॉलोनाइजर अथवा संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सात साल तक की सजा व दस लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। नए नियमों में अवैध कॉलोनियां या निर्माण होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।

सबसे अधिक अवैध कॉलोनियां इंदौर में

प्रदेश में करीब 6876 अवैध कॉलोनियां हैं। ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल और इंदौर में ऐसी कॉलोनियां सबसे ज्यादा हैं। इनमें भी सबसे अधिक अवैध कालोनियां इंदौर में हैं। अवैध कॉलानियों को नियमित करने का संशोधित कानून लागू होने के बाद निर्मित मकानों के नक्शे स्वीकृत होंगे। साथ ही लोग निर्माण के लिए बैंक से लोन भी ले सकेंगे। अवैध कॉलोनियों में नक्शे स्वीकृत नहीं होने सेे कई भूखंड अब भी खाली पड़े हुए हैं। दरअसल, तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने प्रदेश में 3 फ रवरी 2000 को शहरी क्षेत्र में नजूल की जमीनों को (अर्बन सीलिंग) शहरी क्षेत्र घोषित कर दिया था। इसके बाद इन पर अवैध रूप से कॉलोनियों और मकानों का निर्माण होता रहा, लेकिन उन्हें वैध करने के नियम नहीं थे। 4 मई 2002 को इस बारे में तत्कालीन सरकार ने इन कॉलोनियों को वैध करने का निर्णय तो लिया, लेकिन इसका पालन नहीं हो पाया।

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