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निजी अस्पताल बेवजह मंगा रहे रेमडिसिवर, इधर हमीदिया में गंभीर मरीजों को दो दिन में मुफ्त लगे 537 इंजेक्शन

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  • एम्स डायरेक्टर बोले: अर्ली स्टेज में लगे तो ठीक वेंटिलेटर पर शिफ्ट होने के बाद कोई लाभ नहीं
  • मरीजों की व्यथा : निजी अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही डॉक्टर कहते हैं इंजेक्शन की व्यवस्था खुद करना, कई मरीजों को जरूरत नहीं फिर भी मंगवा रहे रेमडिसिवर इंजेक्शन


भोपाल। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश भर में रेमेडी सेवर इंजेक्शन को लेकर मारामारी मची हुई है। सरकार का दावा है कि जरूरतमंद मरीजों को इंजेक्शन मुहैया कराए जा रहे हैं लेकिन शहर के कई निजी अस्पताल मरीजों को भर्ती करने से पहले ही रेमेडी सेवा इंजेक्शन का इंतजाम करने के लिए कह देते हैं इस कारण मरीजों के परिवार जन दवा बाजार में भटकते रहते हैं और ब्लैक मार्केट में उन्हें कई गुना महंगे दामों पर इंजेक्शन खरीदने पड़ते हैं लेकिन दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा बनाई गई व्यवस्था का हमीदिया अस्पताल में बड़ा लाभ हुआ है। 2 दिन के भीतर हमीदिया अस्पताल में 300 मरीजों को मुफ्त में लगाए गए हैं डॉक्टरों की माने तो यह ऐसे मरीज हैं जिनकी हालत गंभीर है और इन्हें रेमेडसेवर इंजेक्शन से लाभ हो सकता है।

48 साल की सुदीप्ति मुखर्जी को हल्का बुखार था। परिवार में दो अन्य लोग पॉजीटिव थे इसलिए वे भी घर के पास के निजी अस्पताल में चली गईं। यहां सीटी स्कैन में फैफड़ों में संक्रमण का स्तर 7/25 यानि करीब 20 फीसदी थी। इसके बावजूद उन्हे रेमेडिसिवर इंजेक्शन का बोला गया। भावना के परिजनों ने छह में से तीन इंजेक्शन खुद लाए, इसके बावजूद बिल में छह इंजेक्शन का पैसा जोड़ा गया। यही नहीं 950 रुपए की कीमत के इंजेक्शन के लिए 550 रुपए लिए गए। राजधानी में कोरोना का संकट गहरा गया है। इस संकट की घड़ी में शहर में दो तस्वीरें सामने आई। पहली निजी अस्पतालों की जहां मरीजों को बिना जरूरत रेमडिसिवर इंजेक्शन लगाए गए, वहीं दूसरी तरफ हमीदिया अस्पताल में दो दिन में 300 मरीजों को 537 डोज दिए गए। बड़ी बात यह है कि इसके लिए मरीजों को कहीं भटकना नहीं पड़ा।

गाइडलाइन की धज्जियां उड़ रही

कलेक्टर के पास रेमेडिसिवर की अर्जी लेकर खड़े प्रवीण जैन ने बताया कि उनके भाई एमपी नगर स्थित एक निजी अस्पवताल में एडमिट है। वहां के अस्पताल के डॉक्टर ने उन्हें रेमेडिसिविर इंजेक्शन लिखा। कई जगह ढूंढा लेकिन नहीं मिली तो इंदौर गया लेकिन नहीं मिली। दवा बाजार में भी इंजेक्शन 10 हजार रुपए का बताया, अब कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।

हमीदिया में मरीजों को पता भी नहीं चला और हो गई व्यवस्था

दूसरी और हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों को रेमडिसिवर इंजेक्शन के लिए परेशान तक नहीं होना पड़ा। हमीदिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती अब्दुल समद ने बताया कि हमने टीवी पर देखा कि रेमडिसिवर के लिए मारामारी हो रही है। हमे लगा कि हम कैसे व्यवस्था करेंगे लेकिन डॉक्टर ने बताया कि आपके इंजेक्शन आ गए है। मुझे दो डोज लग भी गए। इसी तरह 51 साल के केशव लाल ले का कहना था हम यूं ही डर रहे थे, हमीदिया अस्पताल में दोपहर में भर्ती हुए और शाम को इंजेक्शन भी लग गया।

900 से लेकर 5400 तक है कीमत

इस इंजेक्शन को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसकी एमआरपी अलग अलग है। कोई 900 में बचे रहा है तो कोई 4000 हजार में तो कोई 5400 में। कीमत पर भी नियंत्रण होना चाहिए।

  • अगर कोई अस्पताल मरीजों को बिना जरूरत रेमडिसिवर लिख रहा है तो उसकी जांच की जाएगी। ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी।
    डॉ. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ

आंकड़े
4494 डोज हमीदिया को मिले

300 मरीजों को लगाए गए
537 डोज लगाए जा चुके हैं दो दिन में

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