दूसरे राज्यों में मौजूद संपत्ति की नीलामी व प्रबंधन करने नई कंपनी बनाने की तैयारी

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  • अभी सड़क विकास निगम से संभाल रहा यह दायित्व
  • अब तक 30 संपत्तियों की नीलामी, मिले डेढ़ सौ करोड़

भोपाल। दूसरे प्रदेशों में मौजूद लेकिन अनुपयोगी हो चुकी राज्य की अचल संपत्ति का प्रबंधन व नीलामी करने प्रदेश सरकार शीघ्र ही एक नई कंपनी गठित करेगी। इससे मप्र सड़क विकास निगम पर काम का बोझ कम हो सकेगा।

अन्य राज्यों में मौजूद प्रदेश सरकार की संपत्तियों की देखभाल एवं अन्य प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ने लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग बनाया है। विभाग यह कार्य अब तक मप्र सड़क विकास निगम के माध्यम से करते रहा है। निगम का मूल कार्य प्रदेश की सड़क परियोजनाओं को मूर्त रूप देना है। गत माह भवन निर्माण से जुड़े अनेक कार्य भी निगम को सौंपे गए। इससे निगम पर काम का बोझ बढ़ गया है। ऐसे में दूसरे राज्यों में प्रदेश की अनुपयोगी हो चुकी परिसंपत्तियों के संधारण में उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इसे देखते हुए लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग अब एक नई कंपनी बनाने का तैयारी में है। इसे मध्य प्रदेश राज्य परिसंपत्ति मौद्रीकरण एवं प्रबंधन नाम दिया गया है। इसके माध्यम से उक्त कार्य कराया जाएगा। कंपनी गठन के लिए राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी आवश्यक है। इसे देखते हुए शीघ्र्र ही उक्ताशय का प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में लाए जाने के आसार हैं।

अब तक 377 संपत्तियों का हुआ खुलासा

उक्त विभाग के गठन का मूल उद्देश्य अन्य राज्यों में फैली मप्र की अचल संपत्ति का पता लगाकर इन्हें अतिक्रमण से मुक्त कराना,अनुपयोगी हो चुकी संपत्तियों की नीलामी व शेष की देखभाल करना शामिल है। इसी क्रम में विभाग द्वारा जुटाई गई जानकारी में ऐसी 377 अनुपयोगी परिसंपत्तियों का खुलासा हुआ है। इन्हें पोर्टल पर दर्ज कर इनकी ई-नीलामी शुरू की गई। विभाग अब तक 30 परिसंपत्तियों को नीलाम भी कर चुका है। इससे राज्य सरकार को डेढ़ सौ करोड़ रुपए का राजस्व मिला।

कानूनी विवाद निपटारा एक बड़ा काम

बताया जाता है कि प्रदेश की उक्त अनेक संपत्तियां अतिक्रमण की चपेट में है। इसे लेकर कानूनी विवाद भी है। नई कंपनी ऐसे सभी विवादित प्रकरणों का निराकरण कराने का कार्य भी करेगी। मसलन,झांसी स्थित मप्र के विश्राम गृह व इससे लगी करीब 15 एकड़ भूमि का कब्जा मप्र के लोक निर्माण विभाग के पास है,लेकिन भू-अभिलेखों में यह भूमि उत्तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज है।

कमोबेश यही स्थिति केरल स्थित एक फॉर्म हाउस की है। इनके अलावा धर्मस्व विभाग की अनेक संपत्तियां उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ में हैं। इन पर भी बेजा कब्जा होने से ये विवादित हैं। इसी तरह, परिवहन निगम की सीधी, दमोह, मल्हारगंज और इंदौर स्थित परिसंपत्ति को नगरीय निकायों को सौंपा गया है।

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