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गांव में टीका लगवाने पहुंच रहे शहर के लोग, क्योंकि यहां भीड़ नहीं; साहबा गांव में 20 दिन में 16 लोगों की मौत, वजह किसी को नहीं पता

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विदिशा जिले का ग्यारसपुर गांव। यहां टीकाकरण सेंटर पर सब कुछ ठीक चल रहा है फिर भी अधिकारी चिंता में हैं। बीएमओ डॉ. सैय्यद कल्बे अब्बास जैदी इसकी वजह बताते हैं – यहां ग्यारसपुर के अलावा भाेपाल-विदिशा सहित शहरों से भी लोग टीका लगवाने आ रहे हैं। दरअसल गांव के सेंटर का स्लॉट आसानी से मिल रहा है। नटेरन से टीका लगवाने आए युवक मोहन ने बताया, यहां व्यवस्थाएं ठीक हैं, टीका लगाने से पहले बीपी और पल्स अच्छे से चेक की जा रही है। शहरों के भीड़भरे माहौल से बचने के लिए लोग टीके के लिए नजदीकी गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।

ग्यारसपुर में अब तक 2451 लोगों का टीकाकरण हो चुका है। यहां दो दिन में 18 वर्ष से अधिक आयु के 187 लोगों को टीका लग चुका है, लेकिन ऐसी स्थिति सभी जगह नहीं है। त्योंदा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वैक्सीनेशन सेंटर खाली पड़ा मिला। पूछने पर पता चला 15 दिन से वैक्सीन ही नहीं आई। कुआंखेड़ी, भदरबाड़ा, वनगांव और बरेठ में भी केवल 10 फीसदी लोगों का ही वैक्सीनेशन हुआ है। वजह है वैक्सीन की कमी। ग्यारसपुर में मिशनरी स्कूल में बने कोरोना केयर सेंटर में 18 लोग भर्ती हैं।

ग्यारसपुर ब्लॉक में अब तक 360 संक्रमित मिल चुके हैं । इनमें 60 लोग कुंभ से लौटे थे। अब यहां 35 गांवों में 75 एक्टिव केस हैं। वन गांव में अब तक 35 से अधिक कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। पंचायत ने यहां क्वारेंटाइन सेंटर भी खोला है, लेकिन यहां एक भी मरीज आइसोलेट नहीं किया गया। गांव में एक सप्ताह के दौरान दो कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है। मरीजों को इलाज के लिए 20 किमी दूर विदिशा या गुलाबगंज जाना पड़ता है।

जमीनी हकीकत : चाय की दुकान के पीछे झोपड़ी में चल रहा इलाज

विदिशा जिले का गांव कुआंखेड़ी। यहां चाय दुकान के पीछे झोपड़ी में दो महिलाओं को ग्लूकोज की बोतल चढ़ रही थी। खुद को डॉक्टर बताने वाले चंदन मालवीय कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को टाइफाइड बताकर इलाज करते मिले। नजदीकी गांव हिरनई में भी सड़क किनारे एक शटर के अंदर मरीजों को बोतल चढ़ाई जा रही थी। इलाज कर रहे व्यक्ति एन शर्मा ने बताया, हर दिन 30 से 35 मरीज आ रहे हैं। एक मरीज की फीस 150 रुपए है। पूछने पर एक ग्रामीण पवन ने कहा- जिला अस्पताल में तो बेड ही नहीं मिलता। इनसे इलाज नहीं कराएं तो मर जाएं।

साहबा गांव : 20 दिन में 16 लोगों की मौत, वजह किसी को नहीं पता

साहबा गांव में 20 दिन में 16 मौतें हो चुकी हैं। महेंद्र सिंह लोधी ने बताया, कई घरों में दो-दो मौतें हुई। किसी को नहीं पता कि मौत की वजह क्या थी। गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन डॉक्टर नहीं है। मानसिंह कहते हैं – कुछ दिन पहले यहां एक झोलाछाप डॉक्टर इलाज करने आते थे, उनकी भी बुखार से मौत हो गई। तब ऐसे डॉक्टरों ने भी आना बंद कर दिया।

बरेठ में 10 दिन के भीतर 10 से ज्यादा लोगों ने दम तोड़ दिया। यहां के उप स्वास्थ्य केंद्र पर भी ताला लगा मिला। यहां के डॉक्टर को विदिशा अटैच किया है। गांव के लोग इलाज के लिए गंजबासौदा तक जाते हैं, जबकि इन दोनों गांव से 20 किमी दूर त्योंदा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है, जिस पर 80 गांव के करीब 60 हजार लोगों के इलाज का जिम्मा है पर अस्पताल खाली पड़ा था। अस्पताल में सभी 8 ऑक्सीजन सिलेंडर खाली थे।

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