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पूरे हरियाणा में ब्लैक फंगस के 177 मरीज, वहां इसे महामारी माना; भोपाल में 27 दिन में 239 संक्रमित, 10 मौतें, 129 सर्जरी

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कोरोना संकट के बीच भोपाल में एक और मुसीबत हर दिन बढ़ती जा रही है। वो है ब्लैक फंगस। बीते 27 दिन में इसके 239 संक्रमित मिल चुके हैं। 10 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि 174 सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हैं। 129 मरीजों की सर्जरी हो चुकी है। लेकिन राज्य सरकार का आंकड़ा इससे एकदम अलग है। सरकार के मुताबिक प्रदेश में सिर्फ 585 और भोपाल में 68 मरीज ही सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। जब भास्कर ने इन मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और निजी अस्पतालों के संचालकों से सीधे संपर्क कर जानकारी मांगी तब 239 मरीजों का आंकड़ा मिला।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि इन मरीजों की समय पर पहचान हो जाए, इसके लिए राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कोविड पॉजिटिव मरीजों और ठीक हुए मरीजों में ब्लैक फंगस की जांच की जाएगी। ये अभियान 20 मई से शुरू होगा। हमीदिया में ईएनटी डॉक्टर नेजल एंडोस्कोपी मशीन से जांच करेंगे। जिन मरीजों में लक्षण मिलेंगे, उनका इलाज शुरू किया जाएगा। बता दें कि भोपाल के 7 मेडिकल कॉलेज सहित 35 निजी अस्पताल ऐसे हैं, जहां नेजल एंडोस्कोपी मशीन है।

40 अस्पतालों में हो सकता है इसका टेस्ट
दिव्य ईएनटी के संचालक डॉ. एसपी दुबे के मुताबिक उनके पास ब्लैक फंगस का पहला मरीज 23 अप्रैल को आया था। तब से 50 से ज्यादा मरीज आ चुके हैं। 49 के ऑपरेशन हुए। 4 की सर्जरी गुरुवार को होगी। शहर में 40 सरकारी व निजी अस्पताल ऐसे हैं, जहां नेजल एंडोस्कोपी से इसका स्क्रीनिंग टेस्ट हो सकता है। इस टेस्ट से बीमारी जल्द पकड़ में आएगी और इलाज जल्द होगा। जीएमसी की ईएनटी डिपार्टमेंट की हेड डॉ. स्मिता सोनी के मुताबिक यहां 78 मरीज भर्ती हैं। 25 का ऑपरेशन हो चुका है। 10 दिन में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
(शहर में इसका इलाज और सर्जरी करने वाले अभी 114 ईएनटी, 160 नेत्र रोग स्पेशलिस्ट, 170 एनेस्थेटिक, 30 डेंटिस्ट्री, 20 न्यूरोसर्जन हैं। 25 अस्पतालों में इसकी सर्जरी हो सकती है)

रेट तय; 4792 से 5788 रु. तक मिलेगा इंजेक्शन

सरकार ने ब्लैक फंगस के इंजेक्शन एंफोटेरिसिन बी की कीमत 4792 से 5788 रु. तक तय की है। तीन कंपनियों से इंजेक्शन खरीदे जाएंगे। शासन ने इसके मरीजों की निगरानी के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा मेडिकल कॉलेजों में विशेष टीम बना दी है।

तस्वीर गांधी मेडिकल कॉलेज की है। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन यहां सुबह 9 बजे से एंफोटेरेसिन-बी इंजेक्शन के लिए लाइन लगाए हुए थे। इन मरीजों के लिए सिर्फ 240 इंजेक्शन रिजर्व रखे गए थे, लेकिन 80 इंजेक्शन सुबह आधे घंटे में ही बंट गए। इसके बाद इंजेक्शन खत्म होने की बात कहकर परिजनों को लौटा दिया गया।

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