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अस्पताल में कोरोना से मरीज की मौत, लेकिन सरकारी रिकाॅर्ड में ठीक होकर डिस्चार्ज बताया

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कोविड के आंकड़े छिपाने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) मनमर्जी से मरीजों का रिकॉर्ड तैयार करा रहा है। जो मरीज होम आईसोलेशन में ठीक हुए हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती होना दर्ज किया जा रहा है। वहीं, कोरोना से मरने वाले मरीज को स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होना रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। संक्रमितों का आंकड़ा कम करने के लिए कई मरीजों की जानकारी रिकॉर्ड में शामिल ही नहीं की जा रही है। यह खुलासा अप्रैल-मई 2021 की कोविड पॉजिटिव पेशेंट स्टेटस रिपोर्ट की पड़ताल में हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में 1 अप्रैल से 12 मई के बीच 55,883 संक्रमित मिले। इनमें से 8,416 को अस्पताल में भर्ती कराया। 47,437 को होम आइसोलेशन में इलाज दिया। 4,617 संक्रमित अभी सरकारी और निजी कोविड हॉस्पिटल्स में भर्ती हैं। वहीं होम आइसोलेशन में कोरोना का इलाज ले रहे 35,118 ठीक हो चुके हैं, लेकिन हाेम आइसोलेशन से इन मरीजों को बिना किसी जांच के डिस्चार्ज किया गया है, क्योंकि रिकवरी रेट अच्छा बताना है।

चार केस; होम आइसोलेशन में ठीक हुए, लेकिन अस्पताल में भर्ती होना दर्ज किया

नारियलखेड़ा; घर पर ठीक हुए, लेकिन रिकॉर्ड में पीपुल्स में भर्ती
नारियलखेड़ा, शारदा नगर के संदीप सक्सेना (48) शिक्षक हैं। 13 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। NHM से पीसी-बीएचओपीए-399970 नंबर बतौर पेशेंट आईडी दिया। संदीप ने एक क्लीनिक पर इलाज कराया। कहीं भर्ती नहीं हुए, पर कोविड पॉजिटिव पेशेंट स्टेटस रिपोर्ट में उन्हें 13 अप्रैल को पीपुल्स में भर्ती बताया। रिकॉर्ड में अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाना दर्ज किया गया।

शिवनगर; यहां भी यही हाल, रिकॉर्ड में अस्पताल में भर्ती बताया
विदिशा रोड स्थित शिवनगर के अनिल कुमार (24) की रिपोर्ट 13 अप्रैल को पॉजिटिव आई। NHM के रिकॉर्ड में पीसी-बीएचओपीए-399970 पेशेंट आईडी दी गई। करीब 20 दिन होम आइसोलेशन में रहकर वे स्वस्थ हुए, पर कोविड पॉजिटिव पेशेंट करंट स्टेटस रिपोर्ट में अनिल को इलाज के लिए प्रदेश के एक अस्पताल में भर्ती होना और बाद में डिस्चार्ज होना बताया गया है।

रोहित नगर; अस्पताल में मौत, लेकिन रिकॉर्ड में डिस्चार्ज हुईं
रोहित नगर स्थित एक कॉलोनी की 56 वर्षीय महिला ने 20 अप्रैल को कोरोना जांच कराई। अगले दिन रिपोर्ट पॉजिटिव आई। वहीं इलाज के लिए कॅरियर हॉस्पिटल में भर्ती हुईं। यहां से 29 अप्रैल को ठीक होने पर छुट्‌टी कर दी, लेकिन घर पहुंचने के बाद तबीयत गई। वह फिर वहीं भर्ती हुईं, जहां इलाज के दौरान 1 मई को कोविड से मौत हो गई, पर रिकॉर्ड में उन्हें को होम आइसोलेशन में ठीक होने के बाद डिस्चार्ज बताया।

जहांगीराबाद; जेपी में 20 दिन बाद हुई मौत, लिस्ट में नाम नहीं
जहांगीराबाद में रहने वाले नरेश सूर्यवंशी (33) को अप्रैल के दूसरे सप्ताह में कोविड हुआ था। सेहत बिगड़ने पर वह इलाज के लिए जेपी अस्पताल में भर्ती हुए। यहां इलाज के दौरान 2 मई को उनकी मौत हो गई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कोविड पॉजिटिव पेशेंट लिस्ट और कोविड मृतकों की सूची में नरेश का नाम अब तक नहीं जोड़ा गया है।

भोपाल का रिकवरी रेट सुधरा फिर भी ICUऔर HDU के 87% बेड भरे

  1. कोरोना की दूसरी लहर में भोपाल के रिकवरी रेट में अप्रैल की तुलना में मई में सुधार हुआ है। अस्पतालों में बेड की संख्या भी बढ़ाई गई। इसके बावजूद शहर के अस्पतालों के ICUऔर HDU के 87% बेड पर मरीज भर्ती हैं।
  2. यह स्थिति तब है, जबकि कोरोना के नए मरीजों के मिलने की संख्या में औसतन 400 की कमी आई है। 30 अप्रैल को भोपाल के अस्पतालों के आईसीयू और एचडीयू के 97% बेड भरे हुए थे। ऐसी ही स्थिति ऑक्सीजन सपोर्टिड बेड की थी।

ऐसा तो संभव ही नहीं है
इस पर भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया का कहना है कि व्यक्ति कोविड पॉजिटिव हुआ हो और रिकॉर्ड में उसका नाम ना हो, यह संभव नहीं है। घर पर ठीक हुए मरीज का नाम पीपुल्स में भर्ती मरीजों की सूची में कैसे आया? अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण लेगें।

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