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देशव्यापी अभियान : नदियों के संरक्षण करने के लिए ‘नदी को जानो’ प्रतियोगिता

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  • आरएफआरएफ देगी विजेताओं को एक लाख तक का पुरस्कार, 30 तक होंगे शिक्षण संस्थानों के ऑनलाइन पंजीयन

स्वदेश संवाददाता, भोपाल

भारतीय शिक्षण मंडल से संबद्ध रिसर्च फॉर रिसर्जन्स फाउंडेशन ने देश की नदियों के संरक्षण के लिए देशव्यापी अभियान नदी को जानो प्रतियोगिता का आयोजन किया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) एवं राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) के सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता में संस्थाओं को एक लाख रुपए तक का पुरस्कार मिलेगा। प्रतियोगिता में सम्मिलित होने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2021 है। ऑनलाइन पंजीकरण ऑनलाइन के माध्यम से व्यक्ति एवं शिक्षण संस्थाएं भाग ले सकती हैं।

युवा शक्ति को जोडऩा उद्देश्य

भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा प्रवर्तित रिसर्च फॉर रिसर्जन्स फाउंडेशन मानवता एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी क्षेत्रों में वैज्ञानिक, तकनीकी और शैक्षणिक अनुसंधान के द्वारा समाधान प्रदान करने का कार्य करता है। मंडल की मध्यभारत प्रांत इकाई ने बताया है कि जिस तरह हमारे प्रमुख जल स्रोत अनियंत्रित और अंधाधुन विकास के कारण खत्म हो रहे हैं, इसे देखते हुए इस प्रतियोगिता का आयोजन नदियों के प्रति जन जागृति लानेए उनके संरक्षणए पर्यावरण से युवा शक्ति को जोडऩे के उददेश्य से किया गया है।

दो स्तरों में प्रतियोगिता

‘नदी को जानो’ प्रतियोगिता को एक संस्थागत और दूसरा व्यक्तिगत स्तरों पर बाटा गया है। संस्थागत में विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं अन्य स्वयंसेवी संस्थानों के विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक और कार्यकर्ता भाग ले सकते हैं। संस्थागत श्रेणी में हर संस्था से न्यूनतम 250 प्रतिभागियों की संख्या अपेक्षित है। जिसके लिए मात्र 25 रुपये की सहयोग राशि देनी होगी।

संस्थागत स्तर पर देंगे पुरस्कार

संस्थागत स्तर पर प्रतियोगिता विजेताओं को क्रमश: जल संरक्षक एक लाख रुपए, जलोपासक 51 हजार रुपए और जल साथी को 31 हजार रुपए की पुरस्कार राशि मिलेगी। जबकि व्यक्तिगत श्रेणी में 18 वर्ष की आयु तक के प्रत्येक राज्य से जल बाल मित्र को 05 हजार रुपयेए 18 से 25 वर्ष आयु तक के प्रत्येक राज्य से जल युवामित्र को 05 हजार रुपये एवं 25 वर्ष आयु से ऊपर प्रत्येक राज्य से जल मित्र को 05 हजार रुपये पुरस्कार राशि के रुप में दिए जाएंगे।

जीपीएस लोकशन जरूरी

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा। प्रतिभागियों को नदी के भौगोलिक, सांस्कृतिक, पुरातात्विक दृष्टि से उसकी संपूर्ण जानकारी जिसमें उद्गम स्थल से लेकर विलय स्थल तक की जानकारी जीपीएस लोकेशन के साथ प्रदान करनी है।

प्रतिष्ठतों ने दिया समर्थन

इस अभियान को जुनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज, राम जन्मभूमि तीर्थ न्यास के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी महाराज, सतसंग संस्थान, बंगलौर, के एमए सहित अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं समाज के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने समर्थन दिया है।

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