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मध्‍यप्रदेश में एक हजार से ज्यादा वनकर्मी कोरोना संक्रमित, जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था चरमराई

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भोपाल। प्रदेश में जंगल की व्यवस्थाएं भी कोरोना से अछूती नहीं रही हैं। मैदानी पदस्थापना में एक हजार से ज्यादा वनकर्मी कोरोना से संक्रमित हैं, तो सैकड़ों संक्रमण के डर से ड्यूटी से नदारद हैं, ऐसे में जंगल और वन्यप्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। सामान्य वनमंडल ही नहीं, संरक्षित क्षेत्र (टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और अभयारण्य) में भी नियमित गश्त नहीं हो पा रही है। पिछले 11 दिन में प्रदेश में छह बाघों की मौत की एक वजह यह भी है।

वन विभाग में 14 हजार से ज्यादा वनकर्मी प्रदेश के जंगल की हिफाजत कर रहे हैं। इनमें से करीब तीन हजार वनकर्मी संरक्षित क्षेत्रों में पदस्थ हैं, पर पिछले एक महीने से कोरोना संक्रमण के कारण इनकी सेवाएं पूरी तरीके से नहीं मिल पा रही है। वन्यप्राणी मुख्यालय के मुताबिक संरक्षित क्षेत्र और जिन क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही ज्यादा है, उनमें एक हजार से ज्यादा वनकर्मी कोरोना से संक्रमित हैं।

इनमें से कुछ कर्मचारी गंभीर बीमार हैं, जो अस्पतालों में भर्ती हैं, तो कुछ अपने घरों में आइसोलेट हैं। इस स्थिति को देखते हुए सेवाएं दे रहे कुछ वनकर्मी ड्यूटी से नदारत हैं, तो कुछ को दोहरी जिम्मेदारी संभालना पड़ रही है। इस कारण जंगल में नियमित गश्त नहीं हो पा रही है और कोई डर न होने के कारण लकड़ी चोरी और शिकारी गतिविधियां बढ़ गई हैं।

पिछले एक महीने में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और आसपास दो बाघों की मौत हुई है। इसकी मुख्य वजह बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर सहित कुछ और मुख्य अधिकारियों को संक्रमित होना है। दूसरे संरक्षित क्षेत्रों में भी अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में संक्रमित हैं जिससे रात की निगरानी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

कर्मचारी कम होने के कारण यह भी ध्यान नहीं रख पा रहे हैं कि जंगल में वन्यप्राणियों की प्यास बुझाने के लिए पानी है या नहीं। पिछले दिनों वनमंत्री विजय शाह ने विभाग के कार्यों की समीक्षा की थी जिसमें इन बिंदुओं पर चर्चा भी हुई थी और मंत्री ने बाघ-तेंदुओं की मौत के बढ़ते मामलों पर नाराजगी जताते हुए निगरानी बढ़ाने और जंगल में पानी का इंतजाम करने के निर्देश दिए थे।

सवा सौ वनकर्मियों की मौत

वन मुख्यालय के मुताबिक एक महीने के कोरोना काल में प्रदेश में सवा सौ से ज्यादा वनकर्मियों की संक्रमण से मौत हो गई है जिससे मैदानी कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। अधिकारी बताते हैं कि ड्यूटी पर रहते हुए कोरोना से मौत के मामलों में मृतकों के स्वजन को अनुकंपा नियुक्ति दी जाना है, पर इसमें अभी समय लगेगा।

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