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विश्व रंगमंच दिवस पर हुए अनेक आयोजन : ‘नागिन’ की चाहत से बिखरी एक परिवार में खुशियां

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  • रवीन्द्र भवन में खेला गया नाटक ‘नागिन तेरा वंश बढ़े’

भोपाल। सच्चे प्रेम की हमेशा जीत होती है। फिर वह इंसानों के बीच हो या जीव-जंतुओं के बीच ही। रवीन्द्र भवन में आज मंचित हुए नाटक के मूल में भी यही शाश्वत सत्य उजागर हुआ।

विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित समारोह में इस नाटक का मंचन हुआ। नाटक सुप्रसिद्ध राजस्थानी कहानीकार विजयदान देथा की कहानी पर आधारित है। इसे जाने-माने रंग निदेशक अवतार साहनी ने अपने निर्देशन में तैयार किया था। नाटक राजस्थानी पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसलिए वहां का परिवेश जीवंत होता दिख रहा था। राजस्थानी बोली, गीत और सारंगी की धुनों के बीच लोकगीतों के स्वर नाटक का सौंदर्य तो बढ़ा ही रहे थे साथ ही दर्शकों को भी जोड़ रहे थे। अनिकेत भारद्वाज, दिलेश्वर लोहरा मौजूद थे।

‘नागिन ‘ पा ही लेती है सच्चा प्रेम

एक अमीर सेठ शादी के 25 सालों तक नि:संतान है। इससे वह हमेशा दु:खी रहता है। उसकी यह हालत उसकी पत्नी देख नहीं पाती। इसलिए वह मां बनने तथा बच्चे को जन्म देने का नाटक रचती है, सच्चाई छिपाने वह पति को बताती है कि 16 साल तक बच्चे का मुंह नहीं देख सकेंगे। बच्चा दासी के पास रहेगा। पुत्र के प्रेम में सेठ उसकी शर्त मान लेता है। जैसे -तैसे 16 साल का समय बीत जाता है। सेठानी फिर अपने बेटे की शादी का नाटक रचती है। बारात जब एक बावड़ी से गुजर रही होती है तभी वहां एक इच्छाधारी नाग -नागिन के जोड़े की निगाह उस पर पड़ती है। नागिन को इस छलावे का पता चल जाता है, लेकिन वह सेठानी के पुत्र की जगह अपने इच्छाधारी नाग को भेज देती है। नाग सेठानी का पुत्र बनकर वैवाहिक जीवन बिताने लगता है। नाग को आम व्यक्ति का वैवाहिक जीवन जीने में आनंद आने लगता है। वह नागिन को भूल जाता है। नागिन, नाग को वापस लाने के लिए सारे जतन करती है, लेकिन बात नहीं बनती। अंत में नागिन सेठानी को सारी सच्चाई बताती है। इसके बाद इच्छाधारी नाग-नागिन सहित सभी लोग एक छत के नीचे हंसी खुशी रहने लगते हैं।

और सुधर गया ‘चिंटू ‘

दूसरी तरफ गांधी भवन में अघ्र्य कला समिति की ओर से बाल नाटक ‘चिंटू का सपनाÓ मंचन किया गया। इस नाटक मोबाइल और खेल में जुटे बच्चों की पढ़ाई से दूर रहने की आदत बदलने के प्रयास पर केन्द्रित है। इसमें मुख्य पात्र चिंटू को उसके घर के बड़े यह भय दिखाते हैं कि यदि ज्यादा मोबाइल खेलोगे तो भूत आ जाएगा। इसी से डर कर चिंटू अपनी आदत सुधार लेता है। वैशाली गुप्ता के निर्देशन में तैयार नाटक में निमित्त गोयल, ओम पटवा,राजवीर सिंह,अमृत कौर आदि कलाकारों का प्रभावी अभिनय रहा है। इस अवसर पर बाल नाट्य संगीत की प्रस्तुति भी दी गई।

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