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1900 रुपए की हुई डीएपी की बोरी; स्टॉक में 1.18 लाख टन खाद, मांग 10 लाख टन से ज्यादा; पीएम मोदी ने कहा- 1200 रु. में ही मिलेगा

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मध्य प्रदेश में किसानों के सामने खाद का संकट आने के आसार हैं। फिलहाल रीवा, मंदसौर, रायसेन, शिवपुरी समेत कई जिलों में 1200 की डीएपी खाद की बोरी 1900 रुपए में मिल रही है, जबकि बोरियों पर पैकिंग दिसंबर 2020 अंकित है। तब खाद की कीमत 1200 रुपए थी। स्पष्ट है, कंपनियां पुराना माल बढ़े हुए दाम पर बेच रही हैं। मप्र सहकारी विपणन संघ पर एमआरपी बदल कर बेचने के आरोप लग रहे हैं।

इधर, प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा है कि बढ़ोतरी के बावजूद किसानाें को डीएपी की एक बाेरी पुरानी दरों यानि 1200 रुपए में ही मिलेगी।

मध्य प्रदेश में फरवरी 2021 में खाद की एक बोरी 1200 रुपए में बिक रही थी। इसकी कीमत मई माह में अचानक 1900 रुपए हो गई है। कई कंपनियों ने इस कीमत पर भी खाद की आपूर्ति से हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि कंपनियों से सरकार ने कम कीमत के दौरान ही एक लाख टन डीएपी और 10 हजार टन एनपीके खरीद लिया था, लेकिन जरुरत 10 लाख टन से ज्यादा की है।

मंत्रालय सूत्रों का कहना है, खाद की कीमत 700 रुपए बढ़ने उनकी फसल की लागत बढ़ेगी। अभी किसान फसल के लिए खेतों में तैयारी कर रहे हैं। उन्हें खाद की जरुरत 25 मई के बाद से होगी। खाद की मांग जून से तेजी पकड़ सकती है। तब खाद के लिए संकट की स्थिति निर्मित होने की आशंका है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए खाद पर सब्सिडी बढ़ाई जा सकती है। हालांकि जारी वित्तीय वर्ष के लिए सब्सिडी की दरों में बदलाव न कर यथावत रखा गया है।

2019 में 900 रुपए थी कीमत
कमलनाथ सरकार जब सत्ता से बाहर हुई थी, तब डीएपी की एक बोरी की कीमत 900 रुपए थी। इसे दिसंबर 2020 में शिवराज सरकार ने 1200 रुपए कर दिया था। अब इसे बढ़ाकर 1900 रुपए कर दिया गया है। जानकारों का कहना है, प्रदेश में अगले माह करीब साढ़े 9 लाख टन खाद की जरुरत पड़ेगी। चूंकि कीमतों में इजाफा हुआ है। खुले बाजार की हालत ठीक नहीं है, तो खाद को लेकर संकट की स्थिति बन सकती है।

दिग्विजय की मांग- किसानों को खाद घर पहुंचा कर दे सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने खाद की उपलब्धता को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि किसानों के पास आगामी फसल के लिए अपने खेतों को तैयार करने और खाद बीज आदि की व्यवस्था करने के लिए सिर्फ एक महीना बचा है। ऐसे में रासायनिक उर्वरक को सहकारी समितियों के माध्यम से सीधे किसानों के घर तक पंहुचाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जानी चाहिए।

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