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भेल कारखाने में ऑक्सीजन लेने लगी वाहनों की कतार, आठ घंटे में भर पाए सिलेंडर

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  • निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों में रही दहशत, सोशल मीडिया के जरिए मांगी मदद
  • शाम 4 बजे तक दिल्ली से नहीं आई सप्लाई, सुबह से सिर्फ आईनॉक्स से मिली है एक खेप

भोपाल। राजधानी में कोरोना मरीजों की लगातार संख्या बढऩे के साथ ऑक्सीजन का संकट गहरा गया है। वातावरण से ऑक्सीजन बना रहे भेल और भारती एयर प्रोडक्ट के प्लांटों पर सुबह से लंबी कतार लगी है। दोनों प्लांट्स में 24 घंटे काम चल रहा है। भेल ने शुरू में 1800 क्युबिक मीटर ऑक्सीजन सप्लाई की बात कही थी, लेकिन अब ये 5 हजार तक पहुंच गई है। रोजाना मिलने वाली ऑक्सीजन भी गुरुवार दोपहर चार बजे तक कम मिली।

इससे संकट और गहरा गया, बुधवार रात से ही रायसेन, विदिशा, सीहोर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, इटारसी तक ये लोग लगे रहे लाइन में इनको टोकन सिस्टम से 10-10 सिलेंडर भरकर दिए जा रहे हैं। करीब आठ घंटे के इंतजार के बाद कई अस्पतालों के कर्मचारियों को सिलेंडर मिल सके। भेल ने कलेक्टर गाइडलाइन से 26 रुपए प्रति क्यूबिक के रेट रखे हैं। प्लांट में 24 घंटे काम के चलते इनके कर्मचारी भी पॉजिटिव होने लगे हैं।

इधर दिल्ली व अन्य क्षेत्रों से मिलने वाली ऑक्सीजन में कमी होते ही गुरुवार को व्यवस्था चरमरा गई। इधर अस्पतालों में मुख्य टैंक तक खत्म हो गए हैं। जेपी अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होते ही वैकअप से मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई दी गई। इसी बीच आनन फानन में प्रशासन ने 20 जम्बों सिलेंडर वहां भेज दिए। ऐसे ही कई और अस्पतालों से लगातार डिमांड आ रही है।

ऑक्सीजन तलाशते यहां तक आ रहे लोग

इटारसी से ऑक्सीजन की तलाश में पहले मंडीदीप और फिर भेल तक पहुंचे Óवाला प्रसाद बताते हैं कि वे ऑक्सीजन को तलाशतु हुए यहां तक पहुंचे हैं। भेल में टोकन मिला है, लेकिन लाइन काफी लंबी है। अगर जल्द ही गैस का इंतजाम नहीं हुआ तो मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है। भेल के गेट पर दो एम्बुलेंस भी गैस के सिलेंडर लेकर फंसी हुई दिखीें।

अस्पतालों में ऑक्सीजन कम बची तो सोशल मीडिया पर मांगी मरीजों ने मदद

  • गुलमोहर स्थित निर्वाणा हॉस्पिटल में गुरूवार दोपहर दो बजे कहा गया कि यहां सिर्फ एक घंटे की ऑक्सीजन बची है। मरीज अपनी व्यवस्था कर लें। उस वक्त अस्पताल में करीब 24 कोरोना मरीज गंभीर अवस्था में भर्ती थे।
  • नवजीवन हॉस्पिटल में दोपहर 3.10 मिनट पर ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। यहां तीन तरीज वेंटीलेटर पर थे, जिनको छोटे सिलेंडरों से ऑक्सीजन सप्लाई दी गई।
  • माउंट हॉस्पिटल में भी ऑक्सीजन निल पर आ गई। यहां वेंटीलेटर पर छह मरीज और ऑक्सीजन पर चार मरीज थे।
  • आराधना अस्पताल में ऑक्सीजन का एक ही सिलेंडर बचा था, राात नौ बजे से सुबह साढ़े 5 बजे तक ऑक्सीजन न मिलने से मरीजों की सांसें अटकी रहीं।
  • शुभाषीस अस्पताल में भी रात को ऑक्सीजन खत्म होने से संकट गहरा गया था। किसी तरह दो छोटे सिलेंडरों से मरीजों को सांसें दी गईं।
  • राजा भोज अस्पताल में भर्ती एक मरीज के भाई ने वीडियो जारी कर सोशल मीडिया के जरिए अस्पताल में ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की सीएम से गुहार लगाई।
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