Home भोपाल किसानों को करोड़ों का फायदा कराने से मेरा कृषि मंत्री बनना सार्थक...

किसानों को करोड़ों का फायदा कराने से मेरा कृषि मंत्री बनना सार्थक हुआ: कमल पटेल

9
0
  • किसान कल्याण विभाग का 164 करोड़ का बजट पारित
  • मंत्री ने विपक्ष पर किया करारा हमला
  • कहा-उपचुनाव में धोखे का बदला धक्के से मिला
  • जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया बहिर्गमन

स्वदेश ब्यूरो, भोपाल

कृषि मंत्री कमल पटेल ने सोमवार को राज्य विधानसभा में विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उसने कर्जमाफी के नाम पर किसानों को धोखा दिया। इसका बदला मतदाता ने उपचुनाव में उसे धक्के(पराजय) के रूप में दिया। उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी बंपर बहुमत से जीते। श्री पटेल ने कहा कि कांग्रेस के डेढ़ साल के शासन में केवल एक जिला छिंदवाड़ा का भला हुआ क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ केवल इस एक जिले के मुख्यमंत्री थे, जबकि प्रदेश के मौजूदा मुखिया शिवराज सिंह चौहान पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। भाजपा सबका साथ-सबका विकास पर भरोसा करती है, इसलिए उसने समग्र रूप से किसानों की भलाई के कदम उठाए।


श्री पटेल ने यह बात अपने विभाग की अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कही। कृषि मंत्री ने बीते एक साल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि कृषि विभाग का मंत्री बनते ही पहला काम चना व सरसों के प्रति हेक्टेयर खरीद की विसंगति को दूर करने का उठाया। उन्होंने कहा कि महज 13 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के उत्पादन वाले छिंदवाड़ा में चने की खरीदी का मापदंड 19 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तय था। वहीं 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन वाले कांग्रेस के ही कृषि मंत्री के गृह जिला खरगोन में 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर खरीदी का मापदंड तय था। यही हाल होशंगाबाद, हरदा का जहां 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन है। मंत्री बनते ही जब मैंने इस विसंगति की ओर ध्यानाकर्षित किया तो अफसरों का कहना था, वह मुख्यमंत्री थे, उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र वाले जिले के लिए उक्त मापदंड तय कर लिया। हम आपके जिले का कर देते हैं, मैंने कहा, यह नहीं चलेगा। होगा तो सभी जिलों के लिए बराबर।

श्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से विमर्श के बाद न केवल चना बल्कि सरसों की खरीदी की मात्रा भी बढ़ाई गई। यही नहीं गेहूं के साथ ही चना,मसूर व सरसों की खरीदी का भी निर्णय लिया गया। श्री पटेल ने कहा कि यूपीए की मनमोहन सरकार के समय से लागू एक दिन में एक किसान से अधिकतम 25 क्विंटल चने की खरीदी करने के फैसले को भी बदला गया। इसका नतीजा यह हुआ कि मंडियों में चने की खरीदी बढ़ी और मजबूर होकर निजी व्यपारियों,तेल मिलों को चना व सरसों के दाम बढ़ाने पड़े। इससे किसानों को हजार करोड़ रुपए का लाभ हुआ। श्री पटेल ने कहा कि मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे से एक बार तुलाई हो जाने के बाद दूसरी बार तुलाई के नाम पर ली जाने वाली व्यवस्था को बंद किया। इससे न केवल किसान बल्कि व्यापारी भी तुलावटियों के शोषण से बचे। कृषि मंत्री ने कुछ जगह तुलावटियों ने दबाव बनाने का प्रयास किया लेकिन अपराधिक मामला दर्ज होने की भनक लगते ही वे शांत हो गए। यह सब कुछ भाजपा शासनकाल में हुआ।

प्रदेश में 75 प्रतिशत लघु, सीमांत किसान

श्री पटेल ने कहा कि वर्ष 2015-16 में हुई गणना के अनुसार प्रदेश में एक करोड़ तीन हजार 135 किसान हैं। इनमें एक हेक्टेयर से कम जोत वाले सीमांत किसानों की संख्या 48 लाख 34 हजार जबकि एक से दो हेक्टेयर यानी 5 एकड़ तक वाले लघु किसानों की

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here